प्रेस विज्ञप्ति

इंडियनऑयल की मथुरा रिफाइनरी पर्यावरण और प्रौद्योगिकी का समन्वनय
New Delhi, October 13, 2018



1982 में अपनी स्थापना के बाद से, इंडियनऑयल की मथुरा रिफाइनरी पेट्रोलियम रिफाइनिंग और पर्यावरण प्रबंधन के बीच तालमेल का एक आदर्श मॉडल रही है। इसने पारिस्थिातिकी संवेदनशील ताज ट्रैपेज़ियम की बहुमूल्य विरासत की रक्षा और संरक्षण के लिए, प्रौद्योगिकियों और प्रक्रियाओं को लगातार उन्नहत बनाते हुए अपना सफर बहुत जिम्मे दारी से तय किया है। प्रकृति के खज़ाने को सर्वोत्तम तरीके से पारिस्थितिकी अनुकूल और परिष्कृत करना रिफाइनरी के प्रमुख उद्देश्योंण में से एक रहा है।

फॉर्च्यून की 'ग्लोबल 500' रैंकिंग में देश के शीर्ष रैंक वाले भारतीय कॉर्पोरेट इंडियनऑयल ने हरित ईंधन का उत्पादन करने और उत्सर्जन को कम करने के लिए अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों को अनुसंधान एवं विकास के सहयोग से अपनाया है। इसके अलावा, अपने परिचालन को पर्यावरण हितैषी और स्थाायी बनाने के लिए अनेक पहल की गई हैं। निरंतर प्रयासों से, पेट्रोलियम रिफाइनिंग और पर्यावरण प्रबंधन दोनों में निरंतर तालमेल बनाया गया है।

भारत के प्रमुख रिफाइनर के रूप में, इंडियनऑयल पर्यावरण के प्रति पूरी तरह जागरूक है और उसका मानना है कि सतत् विकास आर्थिक विकास, विकास और पर्यावरण सुरक्षा के तीन स्तंभों पर आधारित है।

इस दर्शनशास्त्रा को मथुरा, उत्तर प्रदेश में स्थित इंडियनऑयल की छठी रिफाइनरी में मूर्त रूप में देखा जा सकता है। मथुरा रिफाइनरी की स्थापना 1982 में सामरिक दृष्टिी से महत्व्पूर्ण राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के साथ-साथ घनी आबादी वाले उत्तर पश्चिमी भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के उद्देश्यक से की गई थी।

भारत के दिल को ऊर्जावान बनाते हुए
इंडियनऑयल की 11 रिफाइनरियों में से मथुरा रिफाइनरी छठी रिफाइनरी है, जिसे देश के महत्वनपूर्ण उत्तर पश्चिमी क्षेत्र, , जिसमें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र भी शामिल है, में पेट्रोलियम उत्पादों की मांग को पूरा करने के लिए 1982 में शुरू किया गया था ।

दिल्ली से 150 कि.मी. दूर दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग के साथ स्थित, रिफाइनरी में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल जैसे हल्के और मध्यम डिस्टीरलेट्स के उत्पादन के लिए आधुनिक सेकेण्ड्रीम प्रोसेसिंग यूनिटें हैं।

दुनिया भर में मशहूर बेमिसाल स्थांपत्यी कला का नमूना - आगरा के ताजमहल – के पास रिफाइनरी स्थिबत है और इंडियनऑयल पर यह बड़ी भारी जिम्मेिदारी है कि वह इस स्मारक के आसपास स्थासयी और पर्यावरण-अनुकूल प्रचालन सुनिश्चित करके इसकी समृद्ध विरासत के संरक्षण में योगदान दे।

पर्यावरण जागरूकता में अग्रणी उद्योग प्रति वर्ष 6 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटीपीए) की स्थापित क्षमता वाली इंडियनऑयल की मथुरा रिफाइनरी ने ताजमहल की बहुमूल्य विरासत और उसके आसपास के परिवेश की रक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी को बड़ी निष्ठा् के साथ निभाया है।

संवेदनशील ताज ट्रैपेज़ियम जोन में स्थि‍त होने के कारण मथुरा रिफाइनरी ने पहले दिन से ही कड़े पर्यावरण प्रबंधन मानदंडों का पालन किया है। संयोग से, यह भारत की पहली औद्योगिक इकाई थी जिसके लिए रिफाइनरी की स्थापना से बहुत पहले 1977 में पर्यावरण प्रभाव आकलन किया गया था।

पर्यावरण के प्रति जागरूक एक औद्योगिक इकाई के रूप में, मथुरा रिफाइनरी ने कई वर्षों से विभिन्न सरकारी एजेंसियों तथा भारत के उच्चकतम न्या,यालय की सिफारिशों को समयबद्ध ढंग से लागू किया है:

• रिफाइनरी का अपना कैप्टिव पावर प्लांट है जिसमें तीन गैस टरबाइन हैं जो कोयले की बजाय पर्यावरण अनुकूल प्राकृतिक गैस से चलती हैं।

• 1982 में शुरू होने के बाद से ही रिफाइनरी ने सतत आधार पर परिवेशी सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) उत्सर्जन के स्तर की निगरानी के लिए चार परिवेशी वायु निगरानी स्टेशनों (आगरा की दिशा में सिकंदरा और कीथम में और भरतपुर पक्षी अभयारण्य में एक) की स्थापना की। आंकड़ों से पता चलता है कि रिफाइनरी के प्रचालन से क्षेत्र की वायु गुणवत्ता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा है।

• इंडियनऑयल वर्ष 2006 से वास्तवविक समय आधार पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के साथ इन वायु निगरानी स्टेशनों और रिफाइनरी स्टैक का उत्सर्जन डेटा साझा कर रहा है।

पिछले पांच वर्षों का परिवेश वायु गुणवत्ता डेटा नीचे दिया गया है:


सीमा: 20 माइक्रोग्राम / एम3


परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों के आंकड़ों से पता चलता है कि यदि हम निकटतम स्टेशन फराह (रिफाइनरी से 9 कि.मी. की हवाई दूरी पर स्थित) से कीथम (रिफाइनरी से 28 कि.मी. की हवाई दूरी) की ओर जाते हैं तो सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) उत्सर्जन धीरे-धीरे घटता है। लेकिन जब हम रिफाइनरी से काफी दूरी पर सिकंदरा की ओर बढ़ते हैं, जो कि 35 किमी. मी हवाई दूरी पर है तब उत्सर्जन बढ़ता है। इस प्रकार, यह अनुमान लगाया जा सकता है कि रिफाइनरी से सिकंदरा की ओर जाते हुए SO2 की वृद्धि होती है, जिसका मथुरा रिफाइनरी से संबंध नहीं है।

• यह पुन: सुनिश्चित करने के लिए कि रिफाइनरी के प्रचालन का ताज की शान पर किसी तरह कोई प्रभाव न पड़े, इंडियनऑयल ने एक कदम और आगे बढ़ते हुए मथुरा रिफाइनरी मे न केवल दो सल्फर रिकवरी यूनिट (एसआरयू) बल्किि एक स्टैंड-बाय यूनिट भी स्थाकपित की है ताकि सांविधिक (स्टैरट्यूटरी) निकायों द्वारा निर्धारित SO2 उत्सर्जन की शर्तों को पूरा किया जा सके। इस प्रकार, मथुरा रिफाइनरी को देश की ऐसी पहली रिफाइनरी होने का गौरव प्राप्तव है जहां दो सल्फ,र रिकवरी यूनिटें ऑपरेट होती हैं।

• 1999 में, सल्फर की 99.5% रिकवरी करने के लिए पुरानी इकाइयों के स्था न पर नई सल्फर रिकवरी इकाइयों लगाई गई थीं, जिससे हवा में SO2 उत्सर्जन स्तर और कम हो गया।

• इसके अलावा, वर्ष 2005 में सल्फर रिकवरी यूनिट (एसआरयू) के माध्यम से 99.9% सल्फर की रिकवरी सुनिश्चित करने के लिए एक टेल-गैस रिकवरी यूनिट शुरू की गई थी।

• हरित ईंधन के सफर में हासिल उपलब्धिरयां

o मथुरा रिफाइनरी ने शुरुआत से ही पर्यावरण संतुलन केा बनाए रखते हुए तकनीकी विकास और पर्यावरण के बीच सामन्जेस्यस के इंडियन ऑयल के विज़न को पूरी तरह चरितार्थ किया है। 1995 की शुरुआत में, रिफाइनरी ने कम लेड वाले पेट्रोल की आपूर्ति करने में अग्रणी भूमिका निभाई, और बाद में कैटेलेटिक रिफार्मरों की स्थापना के द्वारा इस क्षेत्र में लेड-रहित पेट्रोल की आपूर्ति की।

o रिफाइनरी ने वर्ष 2000 में (उच्चपतम न्या्यालय के निर्देश के चार वर्षों के भीतर) एक हाइड्रोक्रैकर यूनिट की स्थारपना की, जिससे न केवल SO2 उत्सर्जन को कम करने के साथ-साथ स्विच्छ‍, हरित ईंधन का उत्पादन करने में भी मदद मिलती है।

o वर्ष 2005 में दो प्रमुख यूनिटों नामत: डीजल हाइड्रो-ट्रीटिंग यूनिट और एमएस (पेट्रोल) क्वावलिटी अपग्रेडेशन यूनिट की स्थावपना के साथ मथुरा रिफाइनरी, ऑटो ईंधन नीति रूपरेखा के अनुसार 1 अप्रैल, 2005 से (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और 11 चयनित शहरों में हरित ईंधन आपूर्ति की समय-सीमा) यूरो-III ग्रेड डीजल और पेट्रोल का उत्पादन करने के लिए पूरी तरह से तैयार थी।

o जहां देश भर में 1 अप्रैल, 2017 से यूरो-4 ग्रेड परिवहन ईंधन की आपूर्ति शुरू हुई, वहीं मथुरा रिफाइनरी ने जनवरी 2010 से ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्लीड (एनसीटी) में यूरो-4 ग्रेड पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति शुरू कर पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के लिए निर्धारित 1 अप्रैल, 2010 की समय-सीमा को भी समय से पहले पूरा कर लिया था।

o इतना ही नहीं, वास्तव में, मथुरा रिफाइनरी एनसीटी / दिल्ली के ईंधन स्टेशनों के लिए बीएस-VI ग्रेड पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति करने वाली पहली रिफाइनरी बनी और 1 अप्रैल, 2018 के अग्रिम लक्ष्य को आसानी से पूरा कर लिया, जबकि शेष देश को अप्रैल 2020 से बीएस-VI ईंधन उपलब्धम कराया जाएगा।

• इंडियनऑयल ने प्रदूषण को न्यू नतम करने और आस-पास के क्षेत्र के सौंदर्यीकरण के लिए अपनी सभी परिचालन रिफाइनरियों में वैज्ञानिक रूप से डिजाइन की गई हरित पट्टियां विकसित की हैं। मथुरा में भी, रिफाइनरी, टाउनशिप, आस-पास के गांवों, मथुरा-आगरा क्षेत्र के साथ-साथ ताज और सिकंदरा रिजर्व वन क्षेत्र, और उसके आसपास व्यापक वृक्षारोपण किया गया है।
• मथुरा में रिफाइनरी परिचालन की सौम्यता एफ्लुएंट डिस्चार्ज की गुणवत्ता से परिलक्षित होती है, सीपीसीबी द्वारा निर्धारित न्यूनतम राष्ट्रीय मानकों (एमआईएनएएस) को पूरा करते हैं।

हरे-भरे स्थहल के रूप में पारिस्थि तिकी उद्यान
• रिफाइनरी को हरा-भरा बनाने के प्रयासों के चलते इसके प्रचालन क्षेत्रों के बीचों-बीच विशाल पारिस्थितिकी उद्यान (ईको पार्क) विकसित किया गया है। यह लगभग 4.5 एकड़ क्षेत्र में फैला है। यह उद्यान ईटीपी के उपचार किए गए पानी से सिंचित होता है और पानी नहरें जलीय जीवों और पक्षियों को पोषित करती हैं। रिफाइनरी के बीचों-बीच स्थानीय और प्रवासी पक्षियों के लिए यह लघु पक्षी अभयारण्य प्रकृति की सबसे संवेदनशील रचना अर्थात् मेहमान पक्षियों की मौजूदगी, प्रभावी पर्यावरण प्रबंधन की सफलता की कहानी बयान करती है। पक्षियों की लगभग 100 प्रजातियों, जिनमें 30 प्रवासी प्रजातियां भी शामिल हैं, को एक-साथ देखना रोमांचित करता है। ये प्रजातियां उद्यान के हरियाली युक्तअ सुरक्षित वातावरण में 45 से अधिक किस्मों से घिरे पेड़ों और झाड़ियों में घोंसले बनाती हैं और अंड़े देती हैं। लघु पक्षी अभयारण्य जैव-संकेतक के रूप में कार्य करता है और इसका प्रमाण है कि उद्योग और पारिस्थितिकी, तालमेल बनाते हुए साथ-साथ रह सकते हैं।

अन्य पहल
• स्थानीय समुदाय के लिए अपनी प्रतिबद्धता के तहत, इंडियनऑयल ने 1999 में मथुरा में स्वर्ण जयंती सामुदायिक अस्पताल की स्थापना की। यह 50 बिस्तर वाला अस्पताल निराश्रितों को मुफ्त और अन्य नागरिकों को सब्सिडी दरों पर चिकित्सा सहायता प्रदान करता है। आस-पास के ग्रामीणों को चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करने के लिए दो मोबाइल डिस्पेंसरी भी मौजूद हैं।

• वर्ष 2020-21 से, मथुरा रिफाइनरी मीठे पानी (फ्रेश वॉटर) के स्रोतों से औद्योगिक उपयोग के लिए मीठे पानी (फ्रेश वॉटर) के बजाय उपचार किए गए सीवेज पानी का उपयोग करेगी। रिफाइनरी ने अपने प्रचालनों के लिए नदी के ताजे पानी लेने की जगह मथुरा-वृंदावन क्षेत्र में स्थापित किए जा रहे अवशिष्ट उपचार संयंत्र (एसटीपी) से उपचार किए गए एफ्युएंट (प्रति दिन 20 मिलियन लीटर) का उपयोग करने के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के साथ एक समझौते पर हस्ता)क्षर किए हैं। एसटीपी वर्ष 2020-21 से 10 किलोमीटर की समर्पित पाइपलाइन से मथुरा रिफाइनरी को उपचारित किया गया पानी प्रदान करेगा। एसटीपी में टीटीपी-आरओ की स्थािपना के बाद, मथुरा रिफाइनरी गैर-पेयजल उपयोग के लिए उपचारित सीवेज जल का उपयोग करेगी। ताजा पानी, जिसे रिफाइनरी पहले इस्तेमाल कर रहा था, अब सिंचाई जैसे विभिन्न कार्यों के लिए उपलब्ध होगा। यह यमुना नदी पारिस्थितिकी के संरक्षण की दिशा में रिफाइनरी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

राजकोष में योगदान
वर्ष 2017-18 में, मथुरा रिफाइनरी ने केंद्रीय कोष में 11,355.20 करोड़ रुपए और राज्य सरकार के में 519.68 करोड़ रुपए का योगदान दिया है। पिछले पांच वर्षों में केंद्रीय और राज्य में रिफाइनरी का योगदान नीचे दिया गया है:



हरित सोच के साथ विकास
उच्च मूल्य, पर्यावरण अनुकूल उत्पादों की आपूर्ति पिछले 36 से भी अधिक वर्षों से मथुरा रिफाइनरी की खासियत है। रिफाइनरी ने वर्ष 2000 से 8.0 एमएमटीपीए क्षमता पर प्रचालन करते हुए पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रभावी उपायों को अपनाकर एक हरित रिफाइनरी के रूप में खुद की एक विशिष्ट पहचान बनाई है।

निरंतर उन्न त बनाई जा रही रिफाइनरी ने अपनी प्रोसेसिंग यूनिटों में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों को अपनाकर अपने सफर की रूपरेखा सावधानी पूर्वक तैयार की है। यह पेट्रोलियम रिफाइनिंग और पर्यावरण प्रबंधन के निरंतर तालमेल के लिए एक आदर्श मॉडल है। पर्यावरण अनुकूल तरीकों से प्रकृति के खज़ाने को परिष्कृत करते हुए सर्वश्रेष्ठ नतीजे हासिल करना, मथुरा रिफाइनरी का एक मुख्य ध्येरय है।