प्रेस विज्ञप्ति

विश्व जैव ईधन दिवस – 2018 पर इंडियनऑयल की दो नवीन तकनीकों का अनावरण किया गया
New Delhi, August 10, 2018


भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री कृष्ण पाल ने आज इंडियनऑयल के फ़रीदाबाद कैम्पस मे विश्व जैव ईधन दिवस समारोह के साथ इंडियनऑयल के अनुसंधान एवं विकास केंद्र द्वारा विकसित दो नवीन तकनीकों का अनावरण किया।

इस अवसर पर हरियाणा सरकार के उद्योग, वाणिज्य, कौशल विकास, औद्योगिक प्रशिक्षण एवं पर्यावरण मंत्री श्री विपुल गोयल उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम में लांजाटेक के सीईओ सुश्री जेनिफर होल्मग्रैन एवं इंडियनऑयल, फ़रीदाबाद के प्रशासन, जैव तकनीकी विभाग, एकोग्रीन, और इस्कॉन के वरिष्ठ अधिकारिय़ों ने भी भाग लिया।

इस अवसर पर श्री कृष्ण पाल ने आईओसी-डीबीटी-लांजाटेक पायलट प्लांट का उद्घाटन किया जो इंडियनऑयल अनुसंधान एवं विकास केंद्र में कार्बन डायआक्साइड को अत्यधिक महत्व वाले लिपिड में बदलने के लिए लगाई गई पायलट प्लांट है। तीसरी पीढ़ी के इस जैव इंधन तकनीक का विकास इंडियनऑयल आरएंडडी केंद्र में उच्च जैव ऊर्जा तकनीक के विकास के लिए डीबीटी-आईओसी के द्वारा किया गया है, जिसमें दो तकनीकों को एकीकृत किया गया है-

(क) कार्बन डायऑक्साइड को एसेटिक में बदलने के लिए लांजा-टेक यूएसए की एनारोबिक गैस किणवयन तकनीक।

(ख) अत्यधिक कीमती ओमेगा 3 फैटी एसिड (डीएचएएस) सहित एसेटिक एसिड को लिपिड (एल्गल ऑयल) में बदलने के लिए इंडियनऑयल आरएंडडी एरोबिक किण्वन तकनीक। इसके बाद लिपिड को ट्रांस-एस्टरीकृत किया जाता है, जिसके बाद ओमेगा-3 फैटी एसिड (डीएचएएस) में से एस्टर्स को अलग हो जाता है, जो बेशकीमती उत्पाद है। इसके बाद बचने वाले लिपिड एस्टर्स को जैव इंधन के तौर पर उपयोग में लाया जाता है। डीएचएएस एस्टर्स बच्चों एवं युवाओं के पोषक तत्वों के निर्माण का एक महत्वपूर्ण घटक है और बाल कुपोषण से लड़ने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। इस तरह यह वैल्यू चैन इस प्रक्रिया को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बना देती है।
इसके अलावा श्री कृष्ण पाल ने 5 मिट्रीक टन प्रति दिन उत्पादन करने वाले बायोमेथेनेशन प्लांट की नींव रखी, जहां अपशिष्टों को कीमती इंधन में बदला जाएगा। सक्षम एवं सस्ती बायो-मेथेनेशन तकनीक का विकास इंडियनऑयल आरएंडडी के द्वारा किया गया है। इस तकनीक के द्वारा जैविक अपशिष्टों (नगरपालिका ठोस अपशिष्ट) को ऊर्जा में बदला जाता है, जिसमें निम्न विशेषताएं होती हैः


• उच्चतर बायोगैस का उत्पादन

• अत्यधिक मेथेन, कम कार्बन डाइऑक्साइड

• कार्बन डाइऑक्साइड को मिथेन में बदलना

• उच्चतर उपचार दक्षता

• पर्यावरण अनुकूल

• विविध कच्चे माल के लिए उपयुक्त

अपने कार्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी के तहत इंडियनऑयल आरएंडडी ने फरीदाबाद नगर निगम एवं हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के साथ अपने आरएंडडी सेंटर फरीदाबाद के परिसर के पिछले हिस्से में बड़े पैमाने पर बायो-मेथेनेशन प्लांट लगाने के लिए साझेदारी की है। अपनी घरेलू बायोमेथेनेशन तकनीक पर आधारित इंडियनऑयल द्वारा स्थापित अपने तरह का पहला प्लांट होगा, जो जैविक अपशिष्टों से उपयोगी बायो-गैस तैयार करने में सहायता करेगा, जिस इंधन का इस्तेमाल खाना बनाने, बल्ब चलाने और ऑटोमोबाइल आदि में किया जाता है।

नगर निकायों और दूसरे शहरों जैसे गुरुग्राम एवं नई दिल्ली आदि ने फरीदाबाद बायो-मेथेनेशन परियोजना के मॉडल में गहरी रुचि दिखाई।

आईओसी-डीबीटी-लांजाटेक पायलट प्लांट के बारे मेः

इंडियनऑयल आरएंडडी फरीदाबाद में स्थापित डीबीटी-आईओसी सेंटर विश्व की पहली पॉयलट सुविधा है, जिसमें प्रति दिन 10 किलो कार्बन डाइऑक्साइड को अलग करने के लिए 100 लीटर रिक्टर स्केल पर कार्य किया जाता है। इस तकनीक का पेटेंट अमेरिका एवं जापान सहित कई देशों में कराया गया है। इंडियनऑयल-लांजा टेक को साल 2015 में इस महत्वपूर्ण एकीकरण के लिए पेट्रोफेड के द्वारा स्थापित गेम चेंजर कंपनी ऑफ द ईयर का पुरस्कार दिया गया।

वर्तमान समय में अधिकांश ओमेगा-3 फैटी एसिड एस्टर्स का उत्पादन मछली के तेल से होता है, जिसमें बहुत सारी मछलियों की जरूरत होती है और इसके कारण मछली की दिक्कत हो जाने की परेशानी होती है, जो वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए एक खतरा है। साल 2025 तक ओमेगा-3 फैटी एसिड एस्टर्स के बाजार का अनुमान 60,000 टन प्रतिवर्ष उत्पादन का है (57 बिलियन डॉलर)। वाणिज्यिक ग्रेड डीएचए एस्टर्स की कीमत 500-1200 अमेरिकी डॉलर प्रति किलोग्राम के बीच होती है, जो इसकी शुद्धता पर निर्भर करता है।


तीसरी पीढ़ी की इस प्रसिद्ध जैव इंधन तकनीकी ने कार्बन डाइऑक्साइड अलग करने और कार्बन पुनर्चक्रण की बेहतरीन क्षमता को प्रदर्शित किया है। इस तकनीक से ऐसे प्लेटफार्म बनने की उम्मीद है, जिससे सस्ते दर पर सतत खाना और इंधन उत्पादित की जा सकती है। यह विध्वंसक तकनीक इंडियनऑयल को न केवल कार्बन उत्सर्जन को कम करने में बल्कि डीएचए एवं बायोडिजल जैसे उच्च कीमत वाले उत्पाद पैदा करने में दूसरी प्रतिद्वंद्वियों से आगे कर देगा।

अगर यह पायलट स्तर पर साबित हो जाता है, तो इस तकनीक के पास इंडियनऑयल को बदलने की क्षमता है। कार्पोरेशन प्लांट को वाणिज्यिक प्लांट उपयुक्त रिफायनरी में बनाया जाएगा/2जी एथेनॉल प्लांट जहां मोनो इथाइल ग्लाइकोल से शुद्ध कार्बन डाइऑक्साइड उपलब्ध होता है और 2जी एथेनॉल किण्वन युनिट्स, जहां रिफायनरी से हाइड्रोजन उपलब्ध होते हैं।


बायो-मेथेनेशन टेक्नोलॉजी के बारे में :

बायो-मेथेनेशन प्लांट के लिए, हरियाणा शाहरी विकास प्राधिकरण ने फरीदाबाद के सेक्टर -13 में इंडियनऑयल-आरएंडडी सेंटर के पीछे 3000 वर्ग मीटर जमीन उपलब्ध कराई है। इस प्रयास में, नगर निगम फरीदाबाद संयंत्र के लिए अपनी सहयोगी मैसर्स इको ग्रीन एनर्जी के माध्यम से आवश्यक मात्रा में पृथक कार्बनिक अपशिष्ट की आश्वासित आपूर्ति करेगा।

5 टन प्रति दिन संयंत्र प्रति दिन 250 किलोग्राम से अधिक बायोगैस का उत्पादन करेगा, जो कि 18 एलपीजी सिलेंडरों के बराबर है और 450 किलोग्राम से ज्यादा जैव-खाद की फरीदाबाद के बागानों में उर्वरकों के तौर पर आपूर्ति की जाएगी और इसे हरियाणा शाहरी विकास प्राधिकरण द्वारा बनाए रखा जाएगा. सीएसआर पहल के हिस्से के तौर पर, इंडियनऑयल इस्कॉन फूड रिलीफ ऑर्गेनाइजेशन के साथ मिलकर इस्कॉन की फरीदाबाद रसोई में बायोगैस की आपूर्ति करता है, ये रसोई मिड डे मील योजना के तहत फरीदाबाद में सरकारी स्कूल के 60,000 बच्चों के लिए भोजन बनाती है।

10 अगस्त 2018 को विश्व जैव ईंधन दिवस: एक संक्षेप

पारंपरिक जीवाश्म ईंधन के विकल्प के रूप में गैर जीवाश्म ईंधन के महत्व के बारे में जागरूकता पैदा करने और जैव ईंधन क्षेत्र में सरकार द्वारा किए गए विभिन्न प्रयासों को उजागर करने के लिए हर साल विश्व जैव ईंधन दिवस 10 अगस्त को मनाया जाता है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा पिछले तीन वर्षों से विश्व जैव ईंधन दिवस मनाया जा रहा है.

जैव ईंधन से कच्चे तेल पर आयात निर्भरता कम करने, स्वच्छ पर्यावरण, किसानों को अतिरिक्त आय और ग्रामीण इलाकों में रोजगार पैदा होने जैसे लाभ होते हैं। जैव ईंधन कार्यक्रम का मेक इन इंडिया, स्वच्छ भारत और किसानों की आमदनी को दोगुना करने के लिए भारत सरकार की पहल के साथ तालमेल भी है। साल 2014 से भारत सरकार ने जैव ईंधन के मिश्रण को बढ़ाने के लिए कई पहलें की हैं। प्रमुख पहलों में इथेनॉल के लिए प्रशासनिक मूल्य तंत्र, ओएमसी की खरीद प्रक्रिया को सरल बनाना, उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 के प्रावधानों में संशोधन करना और इथेनॉल खरीद के लिए लिग्नोसेल्युलॉसिक मार्ग सक्षम करना शामिल है।

भारत सरकार की इन पहलों के सकारात्मक नतीजे देखने को मिले हैं. इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2013-14 में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण 38 करोड़ लीटर से बढ़कर इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2017-18 में अनुमानित 141 करोड़ लीटर हो गया है। देश में जैव-डीजल मिश्रण 10 अगस्त, 2015 से शुरू हुआ और वर्ष 2018-19 में, ओएमसी ने 7.6 करोड़ लीटर बायोडीजल आवंटित किया है। तेल पीएसयू इथेनॉल की आपूर्ति बढ़ाने और कृषि बायोमास जलने से उत्पन्न होने वाले पर्यावरणीय मुद्दों पर ध्यान देने के लिए 12 सेकेंड जेनरेशन (2जी) जैव-रिफाइनरियां स्थापित करने की भी योजना बना रहे हैं।

सरकार ने जून, 2018 में जैव ईंधन, 2018 पर राष्ट्रीय नीति को मंजूरी दी है। इस नीति का उद्देश्य साल 2030 तक 20% इथेनॉल मिश्रण और 5% बायो—डीजल मिश्रण तक पहुंचना है. अन्य चीजों के अलावा, ये नीति इथेनॉल उत्पादन के लिए फीडस्टॉक के दायरे को बढ़ाती है और इसने उन्नत जैव ईंधन के उत्पादन के लिए प्रोत्साहन प्रदान किया है।

हाल ही में, सरकार ने ईबीपी कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए सी-भारी गुड़-आधारित इथेनॉल की कीमत में 43.70 रूपये से 40.85 रूपये तक की बढ़ोतरी की है. बी-भारी गुड़-आधारित इथेनॉल और गन्ने के रस आधारित इथेनॉल की कीमत पहली बार 47.40 रूपये पर तय की गई है. सरकार ने ईंधन में मिश्रण के लिए इथेनॉल पर 18% से 5% तक जीएसटी कम कर दिया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय पेट्रोल के लिए इथेनॉल आपूर्ति बढ़ाने के सभी प्रयास कर रहा है और इस दिशा में कई कदम उठाए गए हैं।