इंडियन ऑयल सुलह नियम, 2014

जबकि इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (इसके बाद से आईओसीएल के रूप में उल्लेख किया गया है) विवाद समाधान तंत्र के रूप में व्यापक तौर पर सुलह पर ध्यान केंद्रित करता है और एतदद्वारा सुलह के जरिए विवादों का त्वरित किफायती और सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटान करने के लिए भारतीय मध्यस्‍थता और सुलह अधिनियम 1996 के भाग-।।। के अनुसार वर्तमान नियम बनाता है।

1. शीर्षक

इन नियमों को इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड सुलह नियम, 2014 कहा जाएगा।

2 (i) परिभाषाएं:

“सुलह” का अर्थ उस प्रक्रिया से है जिसके द्वारा पक्षकार परस्पर सहमति से निपटान सलाहकार समिति का गठन करते हैं ताकि संविदात्मक संबंध से उत्पन्न उनके विवाद का सौहार्दपूर्ण ढंग से समाधान निकालने के उनके प्रयास में मदद मिल सके। एसएसी को पक्षकारों पर समाधान या विवाद थोपने का कोई अधिकार नहीं होता।
“संविदा” का अर्थ कार्य संविदा (इसकी विशेष और सामान्य स्थि तियों सहित) से है जिसमें इंजीनियरिंग, खरीद, निर्माण आदि / आईओसीएल का सामग्री क्रय करार, यदि संबंध पर लागू हो, जिससे विवाद उत्पन्न हुआ हो, से संबंधित कार्य शामिल हैं।
“ठेकेदार” का अर्थ संगत संविदा के अंतर्गत परिभाषित ठेकेदार से है जो सुलह कार्यवाहियों का एक पक्षकार है।
“अनुमोदित प्राधिकारी” का अर्थ इस नियमावली के नियम 17 में दी गई वित्तीिय सीमा के अनुसार निदेशक, अध्यक्ष, संविदा समिति या विवाद निपटान समिति / निदेशक मंडल से है।
“विवाद” का अर्थ संविदा में परिभाषित अनुसार ठेकेदार के अधिसूचित दावों से है या कोई दावा, जिस पर आईओसीएल द्वारा परस्पर सहमति हुई हो और इन नियमों के अनुसार ठेकेदार का सुलह के माध्यलम से निपटान हेतु उल्लेख किया जाए। इसमें संविदा से उत्पन्न आईओसीएल का कोई भी दावा शामिल होगा।
“आईओसीएल” का अर्थ इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन लिमिटेड से है।
“नियम(मों)” का अर्थ इन सुलह नियमों से है।
“सुलहकर्ता पैनल” का अर्थ आईओसीएल के कॉरपोरेट कार्य विभाग द्वारा चयनित पात्र व्यक्तियों की सूची से है जिसे नियमों के अंतर्गत सुलह कार्यवाहियों में सुलहकर्ता के रूप में कार्य करने हेतु आईओसीएल के अध्यक्ष द्वारा घोषित किया गया हो।
“पक्षकार” का अर्थ व्याक्तिागत रूप से आईओसीएल और ठेकेदार तथा “पक्षकारों” का अर्थ सामूहिक रूप से आईओसीएल तथा ठेकेदार है।
“निपटान सलाहकार समिति”: सुलहकर्ता को जब कभी विशिष्ट सुलह कार्यवाहियों के लिए नियुक्त किया जाएगा, सुलह हेतु संदर्भित विवाद के संबंध में “निपटान सलाहकार समिति” (इसके बाद से “एसएसी” के रूप में उल्लेख किया गया है) का गठन करेंगे और इसके नाम और स्वसरूप से कार्य करेंगे।
“निपटान समझौता” का अर्थ सुलह से संबंधित विषय के भाग के रूप में सभी विवादों के निपटान में पक्षकारों के बीच हुए समझौता से है।
“कार्य दिवस” का अर्थ भारत सरकार या आईओसीएल द्वारा घोषित राजपत्रित अवकाश और अन्यम सभी छुट्टियों को छोड़कर सोमवार से शुक्रवार तक, जिसमें सोमवार को शुक्रवार दोनों दिवस शामिल हैं, प्रात:10:00 बजे से सायं 5:30 बजे (भारतीय मानक समय) के बीच किसी दिवस से है।
पुल्लिंग में महिला और तटस्थ जेंडर और इसका विपरीत क्रम शामिल होगा। एकवचन में बहुवचन और उसका विपरीत क्रम शामिल होगा।

3.कार्यक्षेत्र और प्रयोज्यता

यह नियम उन विवादों पर लागू होंगे जिनके दावे रु.5,00,00,000/- (पांच करोड़ रुपए) से कम नहीं हैं। तथापि, आईओसीएल द्वारा नियमों के अंतर्गत सुलह हेतु रु.1,00,00,000/- (एक करोड़ रुपए) से कम के दावों पर भी विचार किया जा सकता है बशर्ते कि इसके लिए कोई उचित औचित्यच दिया जाए। ये नियम तब लागू होगे यदि संविदा से संबंधित कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया हो और ठेकेदार/ आईओसीएल ने नियमों के अंतर्गत विशिष्टा विवाद के समाधान के लिए लिखित में अनुरोध किया हो। तथापि, आपवादिक मामलों में चल रहे किसी ठेके के अंतर्गत विवाद(दों) को विशिष्ट अनुमोदन के आधार पर भी संदर्भित किया जाएगा। स्पष्टता के लिए, ठेके से संबंधित विवाद, जिन्हें पक्षकारों द्वारा त्या ग दिया गया है, नियमों के अंतर्गत शामिल नहीं होंगे। उप-नियम (क) और (ख) के नियम विवाद सुलह पर लागू होंगे, जिसमें आईओसीएल घरेलू या अंतरराष्ट्रीय संविदा शामिल होगी। इन नियमो के अंतर्गत सुलह केवल उन विवादों पर लागू होगी, जिन पर पक्षकारों ने इन नियमों के अनुसार सुलह हेतु संदर्भित किए जाने पर सहमति व्यक्त की है और कोई पक्षकार सुलह की अवधि के दौरान किन्हीं दावों, प्रति-दावों के रूप में कोई विवाद दावा नहीं करेगा, जिस पर पक्षकार ने सुलह के संदर्भ हेतु सहमति नहीं दी थी या सहमत न हुआ हो। पक्षकारों की सहमति से, इन नियमों के अंतर्गत समाधान पर भी विचार किया जाएगा, भले ही सुलह निर्धारित विवाद सुलह प्रणाली न हो और/ या यह नियम संगत संविदा / करार के अंतर्गत निर्धारित सुलह नियम न हों। मध्यस्थ या न्यायिक कार्यवाहियों के लंबित होने पर, नियमों के अंतर्गत सुलह कार्यवाहियों के शुरू होने पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा, भले ही इन नियमों के अंतर्गत कार्यवाही मध्यस्थू या न्यायिक कार्यवाहियों के संबंधित विषय के रूप में हों। नियमों में विवादों और पक्षकारों के लचीले, व्यवस्थित, समीचीन और सौहार्दपूर्ण निपटान के लिए कोई व्यापक मानक सुलह प्रक्रिया शामिल है। यद्यपि नियमों से कोई विचलन या अपवर्तन का अर्थ यह नहीं होगा कि सुलह कार्यवाही समाप्त या दोषपूर्ण हो गई है या उसकी वैधता प्रभावित हुई है या जिसके कारण कोई निपटान समझौता हुआ है। तथापि, ऐसा विचलन या अपवर्तन लिखित में होगा।

4.सुलहकर्ता पैनल

आईओसीएल का कॉरपोरेट कार्य विभाग अध्यक्ष आईओसीएल के अनुमोदन से सुलहकर्ता का एक पैनल तैयार करेगा और उसे बनाए रखेगा। इस पैनल में तकनीकी या वित्तह / वाणिज्य या विधि के क्षेत्र में अच्छी साख वाले व्यक्ति शामिल होंगे। इस संबंध में एक नोट अध्यक्ष के अनुमोदन से निदेशक (एचआर) और निदेशक (वित्तस) के जरिए कारपोरेट कार्य विभाग को प्रस्तुत किया जाएगा। अध्यक्ष सुलहकर्ताओं के पैनल में कोई नाम जोड़ या हटा सकता है।
सुलहकर्ता के पैनल में विचार के लिए निम्नलिखित व्यक्ति पात्र होंगे:
भारत सरकार के सेवा-निवृत्त सिविल सेवक, जो अपर सचिव के रैंक से कम के न हों।
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड के अलावा, भारत में किसी “महारत्नह / नवरत्न” कंपनी के सेवा-निवृत्त निदेशक / अध्यक्ष।
अपने संबंधित क्षेत्रों के स्वतंत्र विशेषज्ञ, जो विशेष रूप से भारतीय मध्यस्थ परिषद या दिल्ली अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ केंद्र या भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग चैंबर फेडरेशन या स्कोप मध्यस्थ फोरम में पंजीकृत हों।
भारत में महारत्न और नवरत्न कंपनियों के सेवारत और सेवा-निवृत्त स्वतंत्र बाहरी निगरानीकर्ता।
स्पष्टीकरण: कानूनी क्षेत्र के निदेशक से सुलहकर्ता के संबंध में उप-नियम (ख) को कार्यपालक निदेशक पढ़ा जाए।
सुलहकर्ताओं का पैनल तैयार करते समय, नियुक्तिन अधिकारी उन बातों पर ध्यान देगा, जिनसे स्वतंत्र और निष्पक्ष सुलहकर्ताओं की नियुक्ति सुनिश्चित हो, जो सहायक कंपनियां और संयुक्त उद्यम सहित न तो आईओसीएल के कर्मचारी हों, और न ही परामर्शदाता, व्यापवसायिक या सलाहकार हों।
किसी व्यक्ति को तभी समन्वयक के रूप में पैनलबद्ध किया जाएगा, जब पैनलबद्धता के लिए उसकी सहमति प्राप्त हो जाएगी।
सुलहकर्ताओं के पैनल के साथ एक अनुलग्नक संलग्न होगा जिसमें सुलहकर्ता की अर्हता और उसकी व्यवसायिकता या तकनीकी अनुभव और योग्यता का ब्योरा दिया जाएगा।
जब कोई व्यक्ति समन्वयक के रूप में अपनी संभावित नियुक्ति के संबंध में संपर्क करता है तो वह उन परिस्थितियों का खुलासा करेगा जिससे उसकी निष्पक्षता या स्वतंत्रता के रूप में औचित्यपपूर्ण संदेह पैदा होने की संभावना हो। सुलहकर्ता अपनी नियुक्ति के समय से और पूरी सुलह कार्यवाहियों से अविलंब पक्षकारों को परिस्थितियों का खुलासा करेगा जब तक कि उन्हें ऐसी परिस्थितियों के बारे में पहले सूचना न दे दी गई हो। ऐसा व्यक्ति सुलहकर्ता के रूप में कार्य नहीं करेगा या कार्य करना जारी रखेगा, यदि कोई पक्षकार उसके कार्य करने या कार्य जारी रखने पर आपत्ति करता है। ऐसी परिस्थितियों में निम्नलिखित शामिल होगा:
(i) विवाद से संबंधित मामले से जुड़ा कोई हित या संबद्धता।
(ii) किसी पक्षकार या उसके प्रतिनिधि के साथ कोई संबंध, जिसमें अधिवक्ता और ग्राहक का संबंध शामिल हो।
उप-नियम (क) के अंतर्गत सुलहकर्ताओं के पैनल पर नियुक्ति सामान्यता नियुक्ति की तारीख से 3 (तीन) वर्ष की अवधि के लिए होगी। ऐसी अवधि को अध्यक्ष, आईओसीएल के विवेक पर बढ़ाया या कम किया जा सकेगा। अध्यक्ष द्वारा पैनल की वर्ष-दर-वर्ष आधार पर समीक्षा की जाएगी।
कोई व्यक्ति केवल इसलिए मौजूदा एसएसी में सुलहकर्ता के रूप में कार्य करना बंद नहीं करेगा क्योंकि वह सुलहकर्ताओं के पैनल में शामिल नहीं है।
निम्नलिखित व्यक्तियों को सुलहकर्ता के रूप में पैनलबद्ध होने से अयोग्य ठहराया जाएगा:
व्यक्ति, जिसे दिवालिया घोषित कर दिया गया हो।
व्यक्ति, जिसके खिलाफ अपराधिक न्यायालय द्वारा नैतिक चरित्रहीनता सहित अपराधिक आरोप लगाया गया हो और वह अंतिम फैसले के लिए लंबित हो।
व्यक्ति, जिसे अपराधिक न्यायालय द्वारा नैतिक चरित्रहीनता सहित किसी अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो।
व्यक्ति, जिसके खिलाफ उपयुक्त अनुशासनिक प्राधिकारी द्वारा प्रारंभ की गई अनुशासनिक कार्यवाही लंबित हो या जिसके कारण दंड लगाया गया हो।
सुलहकर्ता के रूप में नियुक्त व्यक्ति नियमों के अनुसूची-क में निर्धारित अनुसार एक वचनपत्र देगा।
सुलहकर्ता के पैनल में शामिल व्यक्ति मात्र सुलहकर्ता के पैनल में शामिल होने के कारण किसी आर्थिक लाभ या पारिश्रमिक या शुल्क या अन्य सुविधाएं प्राप्तल करने के लिए पात्र नहीं होगा।

5.सुलहर्ताओं की नियुक्ति और संख्या

सुलहकर्ताओं को आईओसीएल द्वारा बनाए गए सुलहकर्ताओं के पैनल से एसएससी का गठन करने के लिए नियुक्त किया जाएगा और सुलह कार्यवाहियों की लागत को न्यूनतम करने के लिए स्थानीय सुलहकर्ताओं को नियुक्त करने का प्रयास किया जाएगा। प्रत्येक सुलह में, एसएससी का गठन करने के लिए नियुक्त किए जाने वाले सुलहकर्ताओं की संख्या को निम्नलिखित आधार पर तय किया जाएगा:
i) यदि निपटान के दावे की राशि रु.10,00,00,000/- (दस करोड़ रुपए) से कम है तो दो सुलहकर्ताओं की नियुक्ति की जाएगी।
ii) यदि निपटान के दावे की राशि रु.10,00,00,000/- (दस करोड़ रुपए) या उससे अधिक है तो तीन सुलहकर्ताओं की नियुक्ति की जाएगी।
दो सुलहकर्ताओं वाली सुलह कार्यवाहियों में आईओसीएल द्वारा सुलहकर्ताओं के पैनल से विशेषकर प्रत्येक तकनीकी, वित्तीय या वाणिज्य क्षेत्र से नियुक्त किया जाएगा।
तीन सुलहकर्ताओं वाली सुलह कार्यवाहियों में आईओसीएल द्वारा सुलहकर्ताओं के पैनल से विशेषकर प्रत्येक तकनीकी, वित्तीय या वाणिज्य क्षेत्र और विधि क्षेत्रों से नियुक्त किया जाएगा।
यदि कोई सुलहकर्ता एसएसी से अपना नाम वापस लेता है या सुलह कार्यवाहियों के लिए अनुपलब्ध होता है या कम से कम 2 अनुसूचित बैठकों/ सुनवाई में लगातार अनुपस्थित रहने के कारण पक्षकारों द्वारा एसएसी से हटा दिया जाता है या नियम 4(छ) के अनुसरण में, किसी पक्षकार द्वारा आपत्ति करने पर आगे कार्य नहीं कर सकता तो रिक्ति को जाने वाले सुलहकर्ता की ही तरह किसी वैकल्पिक सुलहकर्ता को नियुक्त करके भरा जाएगा।
किसी सुलहकर्ता को एक समय से अधिक मामलों में सुलहकर्ता के रूप में नियुक्त नहीं किया जाएगा।

6. सुलह कार्यवाहियां शुरू करना

सुलहकर्ता, जो आईओसीएल के साथ विवाद का निपटान करने का इच्छुक हो, सभी विवादों का निपटान करने के अपने प्रस्ताव की संविदा के अंतर्गत परिभाषित अनुसार मालिक को लिखित में नोटिस देगा तथा नियमों के अंतर्गत जो सुलह के लिए संदर्भित किए जाने वाले प्रस्तावित विवादों का सुलह करने के लिए संचार के सामान्य सरकारी अवसरों का प्रयोग करने के बाद सुलह कार्यवाही प्रारंभ करने का अनुरोध करेगा। ऐसे नोटिस को आईओसीएल द्वारा कार्यात्मक निदेशक के अनुमोदन से स्वी कार किया जा सकता है। सुलह के जरिए किसी विवाद को आंशिक रूप से निपटाने और किसी मध्यस्थ के जरिए आंशिक रूप से निपटाने संबंधी किसी लिखित नोटिस पर विचार नहीं किया जाएगा।
यदि आईओसीएल किसी ठेकेदार के साथ सुलहकर्ता द्वारा ऐसे विवाद को निपटाने का इच्छुक है तो मालिक कार्यात्मक निदेशक के पूर्व अनुमोदन से इन नियमों के अंतर्गत सुलह कार्यवाहियां प्रारंभ करने के लिए ठेकेदार को नोटिस देगा।
आईओसीएल, यदि उपयोग समझे, तो सुलह के लिए अनुरोध को स्वीकार कर सकता है जो इन नियमों के अनुसार सुलह के जरिए निपटाए जा रहे आईओसीएल के विवादित दावों के अधीन होगा, या सुलह के लिए प्रस्ताव में उल्लिखित केवल कुछ विवादित दावों के सुलह द्वारा निपटान हेतु प्रस्ताव स्वीकार कर सकता है, और यह प्रस्ता व विनिर्दिष्ट शेष विवादित दावों पर लागू नहीं होगा। ऐसी सशर्त और सीमित स्वीकृति में इन नियमों के अनुसार सुलह द्वारा उसमें उल्लिखित विवादित दावों के निपटान के लिए आईओसीएल द्वारा एक प्रति-प्रस्ताव शामिल होगा और इसे ठेकेदार द्वारा स्वीकार किया जाएगा।
किसी पक्षकार द्वारा किसी प्रस्ताव या प्रति-प्रस्ताव के लिए सुलह कार्यवाहियां प्रारंभ करने की इच्छा व्यक्त करने में अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित ब्यौलरा शामिल होगा:
पक्षकार की पहचान - नाम, कार्यालय का पता, संपर्क और ई-मेल पता, दूरभाष संख्या, सरकारी प्रतिनिधित्व आदि।
दावा की गई राशि के विवरण सहित सुलह के जरिए निपटाए जाने वाले विवाद का विवरण तथा तत्पश्चात् नोटिस देने वाला पक्षकार, इसके बाद कोई नया मुद्दा नहीं उठाएगा।
iii) इन नियमों के अंतर्गत सुलह हेतु विशिष्ट सहमति।
यह वचनबद्धता कि:
• इन नियमों के अनुसार निपटान समझौता या अन्यथा द्वारा सुलह का निष्कर्ष होने तक, सुलह के लिए अनुरोध से शुरू होने वाली अवधि के लिए एसएससी सहित किसी न्यायालय, मध्यस्थ या अन्य फोरम के समक्ष किसी हित का दावा नहीं किया जाएगा;
• यदि सुलह के लिए अनुरोध आमंत्रण स्वीकार कर लिया जाता है तो पक्षकार किसी न्यायालय या मध्यस्थ(थों) के समक्ष या एसएससी के समक्ष, जो अन्यथा या नोटिस में विनिर्दिष्ट के अलावा हों, किसी कार्यवाही में किसी समय कोई दावा नहीं करेगा जो किसी दावा(दावों) को उठाने या अनुसरण करने के अधिकार की शर्त या आरक्षण के बिना छूट देने से संबंधित होगा।
• सुलह कार्यवाहियों के लंबित होने के दौरान, विवाद के संबंध में कोई मध्यस्थ या न्यायिक कार्यवाहियां शुरू नहीं की जाएंगी, जो सुलह के अनुरोध की विषय-वस्तु हो तथा सुलह कार्यवाहियों के लंबित रहने तक ऐसी किसी कार्यवाही की यथास्थिति को बनाए रखने के लिए प्रारंभ की गई हों।
उपर्युक्त उप-नियम (क) और (ख) के अंतर्गत, सुलह हेतु कोई लिखित प्रस्ताव प्राप्त करने वाला पक्षकार सुलह हेतु ऐसे लिखित प्रस्तााव की प्राप्ति के 30 (तीस) दिनों के अंदर दूसरे पक्ष को उसके द्वारा प्रस्ताव को स्वी कार या रद्द करने की सूचना दी जाएगी। तथापि, यदि आईओसीएल उप-नियम (ग) में उल्लिखित अनुसार कोई प्रति-प्रस्ताव देना चाहता है तो वह ऐसा उक्त 30 (तीस) दिनों की अवधि में लिखित में करेगा तथा यदि आईओसीएल ऐसा कोई प्रति-प्रस्ताव देता है तो ठेकेदार ऐसे प्रति-प्रस्ताव के प्राप्त होने के 15 (पंद्रह) दिनों की अवधि के अंदर आईओसीएल को प्रति-प्रस्ताव के उसके द्वारा स्वी्कार या रद्द करने की सूचना देगा। ठेकेदार द्वारा प्रस्ताव के स्वीअकार करने या प्रस्ताव की स्वीकृति या ठेकेदार से प्रति-प्रस्ताेव प्राप्त होने के 15 (पंद्रह) दिनों की अवधि के अंदर, आईओसीएल ठेकेदारों को सूचना देते हुए सुलहकर्ताओं की औपचारिक रूप से नियुक्ति करेगा।
यदि उप-नियम (च) में उल्लिखित अनुसार, निर्धारित समय के अंदर अन्य पक्ष से उपर्युक्त उप-नियम (क) या (ख) या (ग) के अंतर्गत सुलह हेतु किसी प्रस्ताव या प्रति-प्रस्ताव का कोई उत्तर प्राप्त नहीं होता है तो सुलह हेतु प्रस्ताव / प्रति-प्रस्ताव रद्द माना जाएगा।
इन नियमों के अंतर्गत सुलह कार्यवाहियां प्रस्ताव / प्रति-प्रस्ताव स्वीाकार्य करने पर पक्षकार द्वारा सुलह हेतु प्रस्ताव / प्रति-प्रस्ताव के प्राप्त होने की तारीख से शुरू मानी जाएंगी।
यदि पक्षकार उप-नियम (च) में उल्लिखित अनुसार निर्धारित समय के अंदर सुलहकर्ताओं की नियुक्ति और एसएसी के गठन पर सहमत नहीं होता तो सुलह के जरिए विवाद निपटान के प्रयासों को 'असफल' माना जाएगा तथा विवाद को पक्षकारों के बीच हुई सहमति के अनुसार मध्यस्थ हेतु भेजा जा सकता है या पक्षकार मध्यास्थि या न्यायिक कार्यवाहियों की सिफारिश करने के लिए स्वतंत्र होंगे।

7.एसएसी द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया


एसएसी अपने गठन के 6(छह) कार्य दिवसों के अंदर पक्षकारों को विवादित दावा हेतु संक्षिप्त विवरण दायर करने का अनुरोध करेगा, जिसमें विवाद की सामान्य प्रकृति और दावा की गई राशि का उल्लेख किया जाएगा। प्रत्येक पक्षकार अपने लिखित वक्तव्य के साथ विशिष्ट दस्तावेज दायर करेगा, जिसे वह विवादित दावे और विवाद के निपटान के लिए अपने प्रथम प्रस्ताव प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण समझता हो।
एसएसी, यदि आवश्यक समझे, तो पक्षकारों से या उनमें से किसी एक को संबंधित पक्षकार की स्थिति के लिए आगे लिखित वक्तव्य प्रस्तुत करने की अनुमति दे सकता है या अनुरोध कर सकता है और अपनी स्थिति के समर्थन में आगे कोई आवश्यक दस्तावेज दे सकता है जिसमें उसके तथ्यों और आधार को स्पष्ट किया गया हो।
एसएसी में किसी पक्षकार द्वारा प्रस्तुत किसी विवरण, दस्तावेजों और प्रस्तावों को एसएसी का गठन करने वाले प्रत्येक सदस्य को इसकी प्रति दी जाएगी। इसके साथ-साथ, प्रस्तुति की एक प्रति अन्य पक्षकारों को भी दी जाएगी।
पक्षकारों की पहली बैठक एसएसी द्वारा उप-नियम (क) या उप-नियम (ख), जैसी स्थिति हो, दस्तावेजों की प्राप्ति के 10 कार्य दिवसों के अंदर पक्षकारों से परामर्श करने के बाद बुलाई जाएगी। ऐसा समझा जाता है कि इस बैठक से पूर्व एसएसी द्वारा विवादित दावों पर पक्षकारों के संबंधित पदों की प्रथम दृष्टया गुणों और अवगुणों पर विचार करने के लिए बैठक बुला ली गई होगी।
पहली बैठक में, पक्षकार अपनी संबंधित स्थिति का उल्लेख करेंगे तथा अपवर्तन के बिंदुओं की पहचान करेंगे, जिन्हें विवाद का निपटारा करने के लिए उनके द्वारा सुलह करना होगा। पहली बैठक के दौरान, पक्षकार और एसएसी एक अंतिम समय-सीमा तैयार करेंगे तथा सुलह कार्यवाहियों का आगे आयोजन करने हेतु व्यापक कार्य अनुसूची बनाएंगे।
यह परिकल्पना की गई है कि बाद में होने वाली सुलह बैठकों में एसएसी का यह प्रयास होना चाहिए कि दलों के प्रस्ताव के बीच मतभेदों और पक्षकारों की अवधारणाओं के बीच अंतर को कम किया जाए। इसके लिए एसएसी पक्षकारों से विवाद के निपटान के लिए नया और / या संशोधित प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकती है, और पक्षकारों का संभावित दिशा में और विवाद का निपटान करने के लिए प्रत्येक पक्षकार द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले प्रस्तातव की विषय-वस्तु हेतु मार्गदर्शन कर सकती है। इसके लिए और पक्षकारों की सहायता करने के लिए एसएसी प्रत्ये क सुलह की सुनवाई के निष्कर्ष के 7(सात) दिनों के अंदर पक्षकारों को कार्यवृत्त भेजेगी, जिसमें कार्यवाहियों का सार तथा विवादित दावों का निपटान करने की दृष्टि से आगे सुझाव और उपाय शामिल होंगे।
अधिवक्ताओं को सुलह कार्यवाहियों में भाग लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी और पक्षकारों से उनकी संबंधित स्थिति को स्वयं प्रस्तुत करने की अपेक्षा की जाएगी। तथापि, पक्षकार अपना मामला प्रस्तु त करने के लिए अपने विधिवत अधिकृत आंतरिक विधि अधिकारियों को नियुक्त करने के लिए स्वतंत्र होंगे।
सुलह कार्यवाहियों के दौरान पक्षकारों को अपने विचार स्वतंत्र रूप से और बिना किसी भय के व्यक्त करने का अवसर दिया जाना चाहिए ताकि पक्षकार एक दूसरे के दृष्टिकोण को बेहतर ढंग से समझ सकें और उसकी सराहना कर सकें।
इन नियमों के अंतर्गत सुलह कार्यवाहियों की सरकारी भाषा अंग्रेजी होगी।

8. एसएसी की भूमिका

एसएसी अपने विवादों के लिए पक्षकारों द्वारा एक ईमानदार वार्ताकार और सुविधा-प्रदाता की भूमिका निभाएगी। इसके लिए, एसएसी पक्षकारों को संभावित सुलह के लिए बैठक बुलाने और चर्चा करने के लिए प्रोत्साहित करेगी।
एसएसी विवाद की मेरिट पर या किसी पक्षकार द्वारा इसका बचाव करने के लिए अपने विचार व्यक्त कर सकती है, बशर्ते कि एसएसी को किसी भी प्रकार से अपनी इच्छा को किसी पक्षकार पर थोपने या पक्षकारों के बीच किसी मामले या विवाद का निर्धारण या निर्णय करने का अधिकार नहीं होगा।
एसएसी पक्षकारों को या उनमें से किसी को निपटान हेतु किसी प्रस्तारव की संभावित शर्तों पर विचार करने का सुझाव दे सकती है।
एसएसी वस्तुपरकता, निष्पक्षता और न्याय के सिद्धांतों से निर्देशित होगी, और वह विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने के लिए स्वतंत्र, निष्पक्ष और सौहार्दपूर्ण ढंग से मदद करेगी।
एसएसी सभी पक्षकारों के साथ बैठक करेगी या उनसे अलग-अलग बातचीत करेगी।

9. पक्षकारों का सहयोग

पक्षकार एसएसी के साथ विश्वास कायम करते हुए सहयोग करेंगे और विशेषकर लिखित सामग्रियां प्रस्तुत करने, साक्ष्य उपलब्ध कराने, स्पष्टीकरण देने, बैठकों / सुनवाई में भाग लेने आदि को प्रस्तुत करने का प्रयास करेंगे।
चूंकि सुलह एक विवाद निपटान प्रणाली है, अत: पक्षकार कोई विरोधी भूमिका नहीं निभाएंगे, बल्कि दूसरे पक्षकार के दृष्टिकोण को शामिल करने का हर संभव प्रयास करेंगें बशर्ते कि इससे सही कानूनी स्थिति नगण्यर न हो जाए।
पक्षकार विवादों का एक त्वरित, दक्षतापूर्ण अधिकतम सहयोग उपलब्ध कराने तथा विवादों का परस्पर स्वीाकार्य और सौहार्दपूर्ण सुलह करने का हर संभव प्रयास करेगा।
पक्षकार किसी भी तरह से सुलह प्रक्रिया या एसएसी या सुलहकर्ता(ओं) पर कोई अनुचित दबाव डालने का प्रयास नहीं करेगा और उनका पूर्ण सम्मान, ईमानदारी और निष्ठार से आयोजन करेगा।

10. सुलह कार्यवाहियों के लिए स्थल

सुलह की कार्यवाहियां आईओसीएल के नई दिल्ली, मुंबई, चेन्नई या कोलकाता स्थित संबंधित स्थानीय कार्यालय में आयोजित की जाएगी।

11. समय-सीमा
किसी सुलह कार्यवाही में एसएसी की बैठकों की कुल संख्या 6(छह) से अधिक नहीं होगी, जब तक कि अपवाद वाले मामलों में पक्षकार और एसएसी आगे बैठकों के लिए सहमत न दे दें।
एसएसी अपने नियुक्ति की तारीख से 6(छह) माह की समय-सीमा के अंदर अपनी ओर से संपूर्ण सुलह प्रक्रिया (निपटान समझौता को अंतिम रूप देने को छोड़कर) पूरा करने का प्रयास करेगी, जिसकी अवधि को एसएसी द्वारा पक्षकारों के परामर्श से बढ़ाया जा सकता है जो 2(दो) माह की अवधि तक होगी और इसे आगे नहीं बढ़ाया जाएगा, और यदि निपटान समझौते का प्रारूप उक्त / विस्तारित अवधि में तैयार न किया जा सकता हो तो सुलह को 'असफल' माना जाएगा। इससे पक्षकारों को किसी निपटान समझौते के प्रारूप पर स्वतंत्र रूप से सहमत होने और/ या उसे अंतिम रूप देने और/या विवादों में शामिल निपटान समझौता करने से नहीं रोका जाएगा।
आईओसीएल निपटान समझौते के प्रारूप की तारीख से 3(तीन) माह के अंदर निपटान समझौता पर अपनी अंतिम सहमति/ असहमति देगा। आईओसीएल अनुमोदन के लिए 1(एक) माह तक की अवधि के लिए समय बढ़ाने का अनुरोध कर सकता है, जिसके कारणों को लिखित में दर्ज किया जाएगा।
उपर्युक्त उप-नियम (ख) के प्रावधानों के बावजूद, यदि एसएसी का यह मत हो कि पक्षकारों का अत्यधिक विविध, अत्यधिक और /या कट्टरपंथी दृष्टिकोण है या अन्य किसी पर्याप्त कारण से सुलह कार्यवाहियों को अर्थपूर्ण आयोजन करना अब संभव या व्यवहारिक नहीं है तो वह सुलह प्रक्रिया या कार्यवाहियों को समय-पूर्व रद्द कर सकती है।

12. पारिश्रमिक और लागत

एसएसी में शामिल प्रत्येमक सुलहकर्ता रु.20,000/- (बीस हजार रुपए) का रीडिंग शुल्कअ प्राप्तत करने का पात्र होगा।
प्रत्येोक सुलहकर्ता रु.20,000/- (बीस हजार रुपए) का सुविधा शुल्कह भी प्राप्त‍ करने का पात्र होगा, यदि वह निपटान समझौता का प्रारूप तैयार करता है और उसे अंतिम रूप देता है।
उपर्युक्तप के अलावा, प्रत्येक सुलहकर्ता को प्रत्येक सुनवाई बैठक के लिए 20,000 रुपए (बीस हजार रुपए) के शुल्क का भुगतान किया जाएगा।
उपर्युक्तप उप-नियम (क), (ख) और (ग) के अंतर्गत शुल्क, प्रति मामला प्रति सुलहकर्ता किसी भी स्थियति में, सेवा कर को छोड़कर, अधिकतम 2,50,000 रुपए (दो लाख पचास हजार रुपए) से अधिक नहीं होगा।
आईओसीएल का संबंधित कार्यालय या विभाग एसएसी के समन्वय के रूप में कार्य करेगा जिसके द्वारा पक्षकार एसएसी के साथ बातचीत कर सकता है और एसएसी पक्षकारों के साथ बातचीत कर सकती है जिसके द्वारा पक्षकार एसएसी को प्रस्तुत किए जाने वाले सभी वक्तव्य, दस्तावेज और प्रस्तुतियां दायर एवं प्रस्तुत कर सकता हैं। इस प्रयोजन के लिए आईओसीएल द्वारा नियुक्त किए जाने वाले सुलहकर्ता को नियुक्त करके व्यक्ति का नाम सूचित किया जाएगा जो एसएसी के साथ समन्वयक के रूप में कार्य करेगा।
एसएसी सचिवालय सेवाओं के लिए अपनी निजी व्यवस्था करेगी। सचिवालय सेवाओं के लिए संपूर्ण सुलह कार्यवाहियों हेतु एसएसी को पक्षकारों द्वारा संयुक्त रूप से रु.10,000/- (दस हजार रुपए) की एकमुश्त राशि का भुगतान किया जाएगा।
सचिवालय सेवा शुल्क के लिए शुल्क तथा भुगतान के अलावा, सुलहकर्ता रेल / वायुयान किराया, आवास तथा स्थानीय मात्रा सहित सुलह कार्यवाहियों में भाग लेने हेतु किए गए व्य य के भुगतान या प्रतिपूर्ति के लिए भी पात्र होगा। सुलहकर्ताओं को आवास अतिथि गृह, जहां उपलब्ध होगा, उपलब्ध कराया जाएगा।
एसएसी द्वारा सुलह कार्यवाहियों और सुलह समझौते पर खर्च किए गए सुलहकर्ता शुल्क, सचिवालय सेवाओं के भुगतान को पक्षकारों द्वारा समान रूप से वहन किया जाएगा, जिसके लिए एसएसी के नियुक्त होने पर ठेकेदार समन्वयक, जो भुगतान / वितरण के लिए जिम्मेदार होगा, को 2(दो) समन्व्यकों के मामले में रु.5.00 लाख (पांच लाख रुपए) तथा 3 (तीन) सुलहकर्ता के मामले में रु.7.50 लाख (साढे सात लाख रुपए) जमा कराएगा, एसएसी की पहली बैठक को या उससे पूर्व सुलहकर्ता का शुल्क एवं लागत तथा सुलह कार्यवाहियों के लिए होगा। आईओसीएल द्वारा इस खाते से किए गए किसी वितरण के बराबर की राशि जमा कराई जाएगी। यदि जमा राशि ठेकेदार के जमा शेयर को पूरा करने के लिए अपर्याप्त हो तो ठेकेदार विनिर्दिष्ट अनुसार आगे ऐसी राशि जमा करेगा।
सचिवालय सेवा के लिए शुल्क हेतु अंतिम खाता, भुगतान तथा सुलह के व्य य को पुन: समायोजित किया जाएगा और उसे सुलह कार्यवाहियों को रद्द करने पर पार्टियों के बीच निपटाया जाएगा।

13. एसएसी द्वारा सूचना उजागर न करना

सुलह कार्यवाही के रूप में कोई पक्षकार विशेष परिस्थितियों में एसएसी को विवाद के किसी मुद्दे से संबंधित कोई सूचना उपलब्ध कराता है तो उसे गुप्त माना जाएगा और एसएसी उस सूचना को किसी अन्य पक्षकार को उजागर नहीं करेगी।

14.निपटान समझौता


सम्मिलित पक्षकारों के साथ चर्चा और सुनवाई के बाद यदि एसएसी का यह मत हो कि पक्षकारों के लिए विवादित दावों का निपटान करना संभव है तो एसएसी निपटान की शर्तों का प्रारूप तैयार करेगी तथा उसे पक्षकारों को उनके विचार और टिप्पणियों के लिए प्रस्तुत करेगी।
यदि किसी पक्षकार को सुलह की शर्तों के प्रारूप का कोई भाग स्वी कार्य नहीं है तो सुलह की परस्पर स्वीककार्य शर्तों का संभावित समाधान करने के लिए आगे बैठक / सुनवाई आयोजित की जाएगी, जब तक कि सुलह की शर्तों को स्वीकार नहीं कर लिया जाता।
पक्षकारों द्वारा विवाद के निपटान पर सहमति होने पर, एसएसी सुलह समझौते का एक प्रारूप तैयार करेगी और इसे पक्षकारों और एसएसी के सदस्यों द्वारा प्रारंभ किया जाएगा। ऐसे सुलह समझौते का प्रारूप ठेकेदार पर बाध्यकारी होगा लेकिन यह आईओसीएल के अनुमोदन प्राधिकारी के अनुमोदन के अधीन होगा जो ऐसे अनुमोदन को उपर्युक्ति शुरू किए जा रहे सुलह समझौते के प्रारूप के 3 (तीन) माह के अंदर ऐसे अनुमोदन की सूचना देगा। यदि आईओसीएल उक्त 3 (तीन) माह की अवधि या आईओसीएल द्वारा मांगी गई विस्तार अवधि के अंदर निपटान समझौते के प्रारूप को अनुमोदन देने में असफल रहता है तो अनुमान को अस्वीगकृत माना जाएगा। कारपोरेशन का यह मंतव्य है कि विवादों का सुलह, जहां तक संभव हो, सुलह समझौते के अनुसार किया जाए, जब तक कि सुलह समझौते का अनुमोदन न देने का कोई उपयुक्त आधार न हो, ऐसे मामले में ऐसे आधार को कारपोरेशन द्वारा विधिवत दर्ज किया जाएगा।
आईओसीएल द्वारा अनुमोदन की सूचना देने के 15(पंद्रह) दिनों के अंदर पक्षकारों द्वारा अंतिम सुलह समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे तथा उसे एसएसी द्वारा अधिप्रमाणित किया जाएगा।
सुलह समझौते में यह वक्तजव्यस शामिल होगा कि इस पर हस्ताक्षर करने वाला प्रत्येक व्यक्ति (i) संबंधित पक्षकार द्वारा प्रतिनिधित्व करने के लिए पूरी तरह अधिकृत होगा, (ii) उसने इसकी विषय-वस्तु को पूरी तरह समझ लिया हो, (iii) वह बिना किसी दबाव, अनुचित प्रभाव के स्वेच्छा से और पूर्ण सहमति से हस्ताक्षर कर रहा है और (iv) यह अंतिम होगा और पक्षकार के खिलाफ तथा उसके माध्यम से दावा करने वाले व्यक्ति पर बाध्यकारी होगा।
निपटान समझौते पर पक्षकारों द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे और उसे एसएसी द्वारा अधिप्रमाणित किया जाएगा। एसएसी सुलह समझौते की उतनी प्रतियां बनाएगा, जितने पक्षकार हैं और प्रत्येक पक्षकार को समझौते की मूल प्रति दी जाएगी।

15.अन्य कार्यवाहियों में साक्ष्य में गोपनीयता और ग्राह्यता

सुलहकर्ता और पक्षकार तथा उनके प्रतिनिधि, उनके द्वारा प्रस्तुत सभी सूचना, भरे गए दस्तावेजों, साक्ष्य प्रस्तुत मत तथा प्रस्ताव और प्रस्तुतियों, जिन्हेंा सुलह कार्यवाहियों के दौरान आदान-प्रदान किया गया हो, जो कोई भी हों, तथा किसी निपटान की शर्तों की विषय-वस्तु, निपटान समझौते का प्रारूप, जहां इसका खुलासा निपटान समझौते के कार्यान्वयन और प्रवर्तन के प्रयोजन हेतु आवश्यक है, को गुप्त रखा जाएगा।
कोई सुलहकर्ता, कोई पक्षकार या पक्षकार के प्रतिनिधि, जब तक कि विद्यमान कानून द्वारा अपेक्षित न हो या सभी पक्षकार द्वारा अन्यथा लिखित में सहमति न दे दी जाए, सुलह कार्यवाहियों के किसी पहलू से संबंधित कोई न्यादयिक, मध्यस्थ या इसी प्रकार की कार्यवाहियों का कोई प्रमाण नहीं देंगे।
सुलह कार्यवाहियों का कोई पक्षकार, सुलहकर्ता और अन्य कोई तृतीय व्यक्ति, जो किसी सुलह कार्यवाहियों को किसी पक्षकार का प्रतिनिधित्व करता है, निम्नलिखित में से किसी के संबंध में मध्यस्थ, न्यायिक या समान कार्यवाहियों को साक्ष्य के रूप में लागू नहीं करेंगे या साक्ष्य देने पर निर्भर नहीं होंगे।
सुलह कार्यवाहियों में संलग्न किसी पक्षकार द्वारा कोई आमंत्रण या प्रति-प्रस्तासव या यह तथ्यभ कि कोई पक्षकार सुलह कार्यवाहियों में भाग लेने का इच्छुक था;
किसी विवाद के संभावित निपटान या संभावित निपटान की शर्तों के संबंध में सुलह में किसी पक्षकार द्वारा व्यक्त विचार या सुझाव या प्रस्ताव।
सुलह कार्यवाहियों के दौरान किसी पक्षकार द्वारा दिया गया वक्तव्य या प्रस्तुति;
किसी सुलहकर्ता द्वारा दिए गए प्रस्ताव या सुझाव या व्यक्त किए गए विचार;
यह तथ्य कि किसी पक्षकार ने किसी सुलहकर्ता या पक्षकार द्वारा किए गए निपटान हेतु किसी प्रस्ताव को स्वीकार करने पर अपनी इच्छा व्याक्त की थी;
केवल सुलह कार्यवाहियों के प्रयोजन हेतु बनाया गया कोई दस्ताकवेज।
यहां उपर्युक्ता उपर्युक्त उप-नियम (क) से (ग), इसमें उल्लियखित सूचना या साक्ष्य के स्वहरूप के बावजूद लागू होगा।
उपर्युक्त उप-नियम (क) से (घ) के प्रावधान लागू होंगे, भले ही विवाद(दों) से संबंधित मध्यस्थ, न्यायिक या समान कार्यवाहियां लागू होती हों अथवा नहीं, अर्थात् क्या संबंधित विषय सुलह कार्यवाहियों से संबंधित था।
यहां ऊपर उल्लिेखित उप-नियम (क) से (ड.) के अधीन कोई साक्ष्य जो मध्यस्था या न्याकयिक या समान कार्यवाहियों में स्वी।कार्य हो, सुलह में प्रयोग करने के परिणामस्वरूप अग्राह्य न बन गया हो।
इन नियमों के अनुसार, किसी भी विवाद के पक्षकार द्वारा सुलह हेतु कोई आमंत्रण या प्रस्ता्व या प्रति-प्रस्ताेव तथा किसी पक्षकार द्वारा इस नियम के अनुसार सुलह द्वारा निपटान हेतु किसी विवाद के लिए कोई आमंत्रण या प्रस्ताथव या प्रति-प्रस्ताअव द्वारा कोई स्वीकृति तथा सुलहकर्ता के रूप में कार्य करने के लिए किसी नियुक्ति को स्वीतकार करना पक्षकार या सुलहकर्ता, जैसी भी स्थिति हो, की बिना शर्त वचनबद्धता मानी जाएगी, जो इन नियमों के प्रावधानों से बंधी होगी और उसका पालन किया जाएगा।

16.सुलहकर्ताओं की व्यक्तिगत छूट

सुलहकर्ता को दीवानी या आपराधिक कार्यवाही में सुलह कार्यवाहियों के दौरान किसी पहलू या चूक के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा और न ही किसी पक्षकार द्वारा प्राप्त किसी सूचना या उसके द्वारा की गई किसी कार्रवाई या सुलह के संबंध में या उसके दौरान किसी मध्यकस्थप या न्याकयिक कार्यवाहियों में गवाह के रूप में किसी पक्षकार द्वारा बुलाया जाएगा।
किसी सुलहकर्ता को पक्षकारों द्वारा किसी विवाद के संबंध में किसी मध्यस्थ या न्यायिक कार्यवाहियों में पक्षकारों द्वारा नियुक्तक नहीं किया जाएगा जो सुलह कार्यवाहियों की विषय-वस्तु है।

17.आईओसीएल की अनुमोदन प्राधिकारी

पक्षकारों द्वारा आम सहमति बनाने पर तथा एसएसी द्वारा समझौते का प्रारूप तैयार करने पर निपटान समझौते के प्रारूप को अनुमोदन अधिकारी के अनुमोदन हेतु कार्यात्म क प्रमुख को प्रस्तुत किया जाएगा। अध्यक्ष द्वारा अनुमोदित किए जाने वाले अपेक्षित निपटान समझौते के प्रारूप की कार्यसूची को निदेशक (वित्त) की सहमति से कार्यात्मक निदेशक द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा। इसके अलावा, संविदा समिति / निदेशक मंडल द्वारा अनुमोदित किए जाने वाले अपेक्षित निपटान समझौते का प्रारूप निदेशक (वित्त ) की सहमति से अध्यक्ष के माध्यम से संबंधित निदेशक द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा।
विवाद निपटान समिति में निम्नलिखित सदस्य शामिल होंगे :-
i. स्वतंत्र निदेशक (अध्यक्ष)
Ii. स्वतंत्र निदेशक
iii. संबंधित कार्यात्मक निदेशक
iv. निदेशक (वित्तद)
v. सह-योजित अपर निदेशक (अतिरिक्त सदस्य के रूप में), यदि अपेक्षित हो।
इंडियन ऑयल की विवाद निपटान समिति (डीएससी) निपटान प्रस्तावों की जांच करने और उस पर अपनी सिफारिशों के लिए अंतिम प्राधिकारी होगी, जिसका वित्ती य प्रभाव 25 करोड़ रुपए से अधिक होगा। संबंधित कार्यात्मक निदेशक विवाद निपटान समिति का संयोजक होगा। तथापि, निपटान समझौते को बोर्ड द्वारा अनुमोदित प्राधिकारी शिष्टमंडल के अनुसार अनुमोदित किया जाना चाहिए।
अनुमोदित अधिकारी की प्राथमिक भूमिका यह सुनिश्चित करनी होनी चाहिए कि विवादों का यथासंभव समाधान करके सुलझाया जाए। मौजूदा डीओए के अनुसार निपटान समझौता के प्रारूप में वित्तीय प्रभाव निम्नानुसार अनुमोदित किए जाएंगे:

वित्तीीय प्रभाव
कार्यात्मक निदेशक2 करोड रुपए तक
अध्यक्ष2 करोड रुपए से अधिक और 5 करोड रुपए तक
संविदा समिति5 करोड रुपए से अधिक और 25 करोड रुपए तक
निदेशक मंडल 25 करोड रुपए से अधिक

बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत सभी निपटान दावों पर पहले विवाद निपटान समिति द्वारा विचार किया जाएगा और इसकी सिफारिशों के बाद ही बोर्ड अनुमोदन पर विचार करेगा। जहां तक आईओसीएल का संबंध है, अनुमोदन प्राधिकारी का निर्णय निपटान समझौते की शर्तों के संबंध में अंतिम होगा।

18. सुलह कार्यवाहियों का समापन

निम्नलिखित में से किसी एक के होने पर सुलह कार्यवाहियां रद्द कर दी जाएगी:

पक्षकारों द्वारा निपटान समझौते पर हस्ताक्षर करने की तारीख।
एसएसी द्वारा पक्षकारों के साथ परामर्श करने के बाद सुलह के लिए आगे किए गए कोई प्रयास औचित्यपूर्ण न हों।
एसएसी को संबंधित पक्षकारों द्वारा लिखित में घोषणा की तारीख, कि सुलह कार्यवाहियां रद्द कर दी गई हैं।
किसी पक्ष द्वारा किसी अन्य पक्षकार और एसएसी, यदि नियुक्त हो, को लिखित में घोषणा करने की तारीख, कि सुलह कार्यवाहियां रद्द की जाती हैं।
सुलह कार्यवाहियों के पूरा होने पर निर्धारित किसी समय के समाप्त होने पर या पक्षकार द्वारा उसका कोई विस्तार करने पर।
इन नियमों के अंतर्गत अपेक्षित अनुसार किसी पक्षकार द्वारा राशि का भुगतान न करने पर।
इन नियमों के अनुसार एसएसी का गठन करने के लिए किसी सुलहकर्ता की नियुक्ति करने के लिए किसी पक्षकार द्वारा असफल रहना।

19. विविध

यह नियम भारतीय मध्यस्थ और सुलह अधिनियम 1996 के भाग-III के अधीन और अनुपूरक होंगे, तथा यह किसी असंगतता के मामले में पिछले नियम को प्रतिस्थापित करेंगे।

अनुसूची - क: निपटान सलाहकार समिति के सदस्यों द्वारा स्वीकृति और स्वतंत्रता की घोषणा