स्‍थायित्‍व

बेहतर कल के लिए

आर्थिक विकास को अब गरीबी कम करने और समाज के कल्‍याण के लिए एक रणनीति के रूप में नहीं देखा जाता। ऐसा समझा जाता है कि समाज का आर्थिक लक्ष्‍य, उसके सामाजिक और पर्यावरणीय लक्ष्‍यों के साथ गहराई से गुंथा होता है। यह स्‍वीकारोक्‍ति भी इंडियन ऑयल के एक सुदृढ़ स्‍थायी व्‍यवसाय का निर्माण करने के लिए इंडियनऑयल की प्रतिबद्धता के पीछे एक प्रेरक शक्‍ति है, जो समुदाय में गहरे में जड़ें जमाए है और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील है।

त्रि-आयामी पहलू

CSR


















नवीकरणीय ऊर्जा के लिए इंडियनऑयल उद्देश्‍य न केवल इसके ऊर्जा पोर्टफोलियो का विविधीकरण करना है बल्‍कि इससे ऊर्जा की कमी को दूर करना और भारत में ‘सबसे निचले तबके’ को ऊर्जा उपलब्‍ध कराने में सुधार करना है। प्रचालनों में, विशेषकर ऊर्जा और पानी जैसे मुख्‍य स्रोतों में संसाधन दक्षता में सुधार लाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं तथा विनियामक आवश्‍यकताओं के अनुसार या उद्योग की उत्‍कृष्‍ट परिपाटियों से इतर प्रदूषण की रोकथाम तथा अपशिष्‍ट के निपटान के लिए सभी प्रकार के अपशिष्‍टों के ‘‘3-आर’’ (घटाना, रिसाइकिल तथा पुन: प्रयोग) सिद्धांतों को अपनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। कॉर्पोरेशन ने वर्ष 2017 तक सभी रिफाइनरियों, कार्यालय भवनों, टाउनशिपों, स्‍थापनाओं और ईंधन स्‍टेशनों में पारंपरिक लाइट के स्‍थान पर एलईडी लाइट लगाने के लिए एक व्‍यापक नीति भी बनाई है।

इंडियन ऑयल का पर्यावरणीय उद्देश्‍य

  • इसके कार्बन फुटप्रिंट को कम करना
  • पर्याप्त् मात्रा में और शुद्ध जल संग्रहण
  • अपशिष्टत दायित्वक का प्रबंधन
कॉर्पोरेशन में वैकल्‍पिक ऊर्जा स्रोतों का दोहन करने के अलावा, ग्रीन ऑटो ईंधन, ऊर्जा दक्षता प्रौद्योगिकियों, बाजार का रुख ग्रामीण समुदायों की ओर करने जैसे कुछेक उपायों पर कार्रवाई की जा रही है। इस सफर की महत्‍वपूर्ण उपलब्‍धि हैं:

Solar Energy
सौर ऊर्जा (ग्रिड):
राजस्‍थान में रावरा में 5 मेगावाट की क्षमता वाली इंडियन ऑयल ग्रिड से संबद्ध सौर फोटो वोल्‍टिक (पीवी) परियोजना ने 7.6 मिलियन यूनिट नवीकरणीय विद्युत का उत्‍पादन किया, जिसके कारण वर्ष 2015-16 के दौरान 6.2 टीएमटीसीओ2ई कार्बन उत्‍सर्जन में कमी आई है।

भवनों की छतों तथा अतिरिक्‍त भूमि पर सोलर पीवी संयंत्रों की स्‍थापना द्वारा दैनिक प्रचालनों में सौर विद्युत को प्रोत्‍साहित करने की नीति के भाग के रूप में 1.7 मेगावाट सोलर पीवी को विभिन्‍न रिफाइनरियों, स्‍थापनाओं तथा कॉर्पोरेशन के कार्यालय भवनों में स्‍थापित किया गया है, जिनकी कुल वार्षिक उत्‍पादन क्षमता 1.7 मिलियन यूनिट है तथा इसमें 1.3 टीएमटीसीओ2ई वार्षिक कार्बन उत्‍सर्जन कम करने की क्षमता है।

Wind Energy

पवन ऊर्जा:
गुजरात में कच्‍छ (21 मेगावाट) तथा आंध्र प्रदेश में वज्रकरुर और गांडिकोटा (48.3 मेगावाट) में इंडियनऑयल की पवन ऊर्जा परियोजनाओं से विद्युत उत्‍पादन वर्ष के दौरान 124 मिलियन यूनिट (कि.वाट घंटा) तक पहुंच गया, जो 102 टीएमटीसीओ2ई (हजार मीट्रिक टन कार्बन डाइआक्‍साइड समकक्ष) की उत्‍सर्जन कमी से संबंधित है।

परमाणु ऊर्जा:
इंडियन ऑयल ने दबावयुक्‍त हेवी वॉटर आधारित रिएक्‍टर (पीएचडब्‍ल्‍यूआर) प्रौद्योगिकी से रावतभाटा, राजस्‍थान में 2 x 700 मेगावाट परमाणु विद्युत संयंत्र लगाने के लिए न्‍यूक्‍लीयर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के साथ एक संयुक्‍त उद्यम कंपनी की स्‍थापना की है। इस परियोजना को 2017 तक पूरा किया जाना है।



जैव ईंधन:
इंडियन ऑयल और छत्‍तीसगढ़ नवीकरणीय ऊर्जा विकास प्राधिकरण (सीआरईडीए) ने इंडियन ऑयल क्रेडा बॉयोफ्यूल्‍स लिमिटेड नामक एक संयुक्‍त उद्यम बनाया है और छत्‍तीसगढ़ के विभिन्‍न जिलों में जटरोफा करकास का लगभग 6000 हेक्‍टेयर क्षेत्रफल में पौधरोपण किया है। वर्ष 2009 में झाबुआ जिला, मध्‍य प्रदेश में राजस्‍व बंजरभूमि पर एक प्रायोगिक जटरोफा पौधरोपण परियोजना शुरू की गई जिसके अंतर्गत लगभग 300 हेक्‍टेयर क्षेत्रफल पर पौधरोपण किया गया है। छत्‍तीसगढ़ और मध्‍य प्रदेश में परियोजनाओं से 3.5 लाख से अधिक श्रम दिवस ग्रामीण रोजगार का सृजन हुआ है ।

उत्‍तर प्रदेश में जटरोफा करकास पौधरोपण के लिए मनरेगा वित्‍त-पोषण से बॉयोडीजल मूल्‍य श्रृंखला की स्‍थापना करने के लिए पी4 मॉडल (सार्वजनिक-निजी-पंचायत-भागीदारी) के अंतर्गत रुचि सोया औद्योगिक लिमिटेड के साथ इंडियनऑयल–रुचि बॉयोफ्यूल्‍स एलएलपी बनाया गया है। एलएलपी में उत्‍तर प्रदेश के पांच जिलों में लगभग 1700 हेक्‍टेयर पौधरोपण पूरा किया है।  

अन्‍य पहलों में निम्‍नलिखित शामिल हैं-

CNG Retail Outlet

खुदरा बिक्री केन्द्र में सोलर संयंत्र लगाना:
वितरण यूनिटों तथा लाइटिंग लोड के लिए डीजल जेनरेटरों के उपयोग को न्‍यूनतम करने के लिए खुदरा बिक्री केन्‍द्रों में सोलर फोटो वोल्‍टिक प्रणालियां स्‍थापित की जा रही हैं जिसके द्वारा कार्बन उत्‍सर्जन में कमी आएगी। वर्ष 2015-16 में, लगभग 15 मेगावाट की संचयी स्‍थापित क्षमता वाले लगभग 4200 ईंधन स्‍टेशनों, जिनमें किसान सेवा केन्‍द्र आउटलेट भी शामिल है, में सोलर पीवी विद्युत उत्‍पादन प्रणालियां स्‍थापित की गई थीं।

पारिस्थिातिकी फुटप्रिंटिंग:
कार्बन उत्‍सर्जनों, पानी के प्रयोग तथा अपशिष्‍ट सृजन के अनुसार इंडियनऑयल प्रचालनों के पारिस्‍थितिकी फुटप्रिंट का जायजा लेने के लिए वर्तमान में ‘‘जैसा है’’ अभियान चलाया जा रहा है।

कार्बन तटस्थथता:
इंडियन ऑयल अपने सभी प्रमुख कार्यक्रमों / कार्यशालाओं / संगोष्‍ठियां / सम्‍मेलनों को कार्बन मुक्‍त बनाने के लिए अपने कार्बन फुटप्रिंट के प्रति सजग है और निरंतर प्रयत्‍नशील है। कार्बन सिंक के रूप में सेवा करने के लिए इंडियनऑयल ने विभिन्‍न स्‍थापनाओं में 2 मिलियन वृक्ष लगाकर एक हरित पट्टी का विकास किया है, जिसमें 2015-16 के दौरान लगभग 50,000 पौध लगाई गई थी।

वर्षाजल एकत्रीकरण:
इस तथ्‍य को ध्‍यान में रखते हुए कि पानी एक बहुमूल्‍य संसाधन है, इंडियनऑयल अपनी अनेक स्‍थापनाओं में वर्षाजल एकत्रीकरण परियोजनाएं शुरू कर रहा है। इंडियनऑयल ने वर्ष 2015-16 में 66 वर्षा जल एकत्रीकरण प्रणालियों की स्‍थापना की है। संचयी रूप से, कॉर्पोरेशन में अब लगभग 2.9 बिलियन लीटर की वार्षिक एकत्रीकरण क्षमता वाली 505 वर्षा-जल प्रणालियां हैं, जिसमें 950 हेक्‍टेयर संयुक्‍त जलग्रहण क्षेत्र शामिल है।


Solar lanterns
कार्बन अपशिष्टं का पारिस्थि्तिकी अनुकूल उपयोग:
रसाई / वानिकी कार्बनिक अपशिष्‍ट का पर्यावरण अनुकूल ढंग से निपटान के लिए स्‍थलों में कार्बनिक अपशिष्‍ट कंवर्टरों के प्रयोग को प्रोत्‍साहित किया जा रहा है।

सौर लालटेन:
चूंकि 50% से अधिक भारतीय आबादी को बिजली उपलब्‍ध नहीं है, अत: इंडियनऑयल देश भर में फैले अपने व्‍यापक खुदरा नेटवर्क तथा किसान सेवा केन्‍द्रों के जरिए सौर लालटेनों द्वारा ‘‘सबसे निचले तबके’’ को बुनियादी ऊर्जा समाधान उपलब्‍ध कराने का प्रयास कर रहा है। कॉर्पोरेशन ने 2015-16 में अपने खुदरा बिक्री नेटवर्क के जरिए छोटे शहरों, अर्द्ध-शहरों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 3,60,000 से अधिक सौर लालटेन की बिक्री की है।

जागरूकता सृजन कार्यक्रम:
कॉर्पोरेशन के प्रत्‍येक कर्मचारी में स्‍थिरता की भावना पैदा करने के लिए नियमित कार्यशालाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।