प्रेस विज्ञप्ति

मथुरा रिफाइनरी की यात्रा 100% BS-VI ईंधन के उत्पादन की ओर
New Delhi, February 07, 2020


भारत चरण उत्सर्जन मानक (BSES) भारत सरकार द्वारा मोटर वाहनों से वायु प्रदूषकों के उत्सर्जन को विनियमित करने के लिए लगाए गए मानक हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत मानकों और कार्यान्वयन की समय-सीमा निर्धारित की जाती है।


अक्टूबर 2010 के बाद से, भारत स्टेज (BS) III उत्सर्जन मानदंड पूरे देश में लागू किए गए हैं, जिन्होंने क्रमशः MS (पेट्रोल) और HSD (डीजल) में 150 पीपीएम (प्रति मिलियन) और 350 पीपीएम तक सल्फर सामग्री की अनुमति दी है।


बाद के चरण में BS-IV उत्सर्जन मानदंड के रूप में उत्सर्जन मानदंड को और कड़ा किया गया था जो अप्रैल 2017 से प्रभावी किए गए थे। इन मानदंडों ने सल्फर को MS (पेट्रोल) और HSD (डीजल) में 50 पीपीएम स्तर तक की अनुमति दी थी।


वायु प्रदूषण को कम करने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में, जनवरी 2016 में, भारत सरकार (जीओआई) ने एक ऐतिहासिक फैसले के माध्यम से न केवल बीएस-V उत्सर्जन मानदंडों को छोड़ने की घोषणा की, पैन - भारत आधार पर बीएस- VI मानदंडों को 1 अप्रैल, 2020 से लागू करने का भी निर्णय लिया। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) मे अप्रैल'18 और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीटी) मे अप्रैल'19 से क्लीनर (बीएस- VI अनुपालन) ईंधन को रोल करने के लिए एक समय सीमा भी निर्धारित की गई थी।


ऐसे समय में जब सभी भारतीय रिफाइनरियां BS-IV अनुरूप ईंधन का उत्पादन कर रही थीं, IOCL मथुरा रिफाइनरी BS-VI अनुरूप ईंधन (सल्फर - 10 पीपीएम से कम) के साथ एनसीटी क्षेत्र की आपूर्ति की आवश्यकता को पूरा करने के लिए चुनौती लेने वाली पहली रिफाइनरी थी। इसकी मौजूदा सुविधाओं / इकाइयों के साथ ही जनवरी 2018 में सफलतापूर्वक बीएस-VI अनुपालन ईंधन एनसीटी  और एनसीआर मे निर्धारित तिथि से पहले ही मथुरा रिफाइनरी ने शुरू किया जो अभी भी जारी है।


इसके अलावा, सबसे कठोर BS-VI मानदंडों को पूरा करने के लिए मथुरा रिफाइनरी में उत्पादित MS (पेट्रोल) और HSD (डीजल) के कुल उत्पादन को उन्नत करने के लिए, कुछ सुधार परियोजनाओं को गुणवत्ता सुधार परियोजना (QIP) के तहत लिया गया था। इनमें मौजूदा प्रक्रिया इकाइयों में संशोधन शामिल थे जिनमें डीज़ल हाइड्रो डिसल्फ़राइज़ेशन यूनिट (डीएचडीएस) और गैसोलीन हाइड्रो डिसल्फ़राइज़ेशन यूनिट (प्राइम-जी) शामिल हैं। अब, IOCL मथुरा रिफाइनरी ने परियोजना के सभी कार्यो को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है और जनवरी 2020 में संशोधित सुविधाओं को सफलतापूर्वक चालू कर दिया है।


इन सुविधाओं के कमीशन के साथ, मथुरा रिफाइनरी अब अपने MS (पेट्रोल) और HSD (डीजल) की 100% आपूर्ति BS-VI मानदंडों को पूरा कर रही है।


यह ध्यान रखना बहुत महत्वपूर्ण है कि BS-VI MS (पेट्रोल) और HSD मे BS-IV ईंधन विनिर्देशों में परिवर्तन के साथ 5 गुना की कमी आयेगी जो कि 80 प्रतिशत की कमी है और इससे पर्यावरण में बदलाव होगाऔर यह क्लीनर फ्युल होगा। इस क्लीनर उत्पाद से सभी को स्वास्थ्य सम्बंधी लाभ होगा।