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इंडियन आयल फाउंडेशन

इंडियन आयल फाउंडेशन: भविष्य के लिए अतीत का झरोखा

भारत की धरती में व्यारपक विविधता है – संस्कृति, लोग और भाषा। भारतीय इतिहास की झलक प्राचीन काल में भी देखी जा सकती है, जो समृद्ध और प्रेरणादायी है। पिछली सदियों में निर्मित बड़ी संख्या में विरासत स्मा रक आज भी शान से खड़े हैं जो हमारे गौरवशाली अतीत का प्रमाण हैं। अपने गौरवपूर्ण इतिहास को बचाने, उसका परिरक्षण करने और प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से इंडियनऑयल ने वर्ष 2000 में एक गैर-लाभकारी ट्रस्ट इंडियन ऑयल फाउंडेशन (आईओएफ) का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई), संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की राष्ट्रीय संस्कृति निधि के सहयोग से सृजन किया था। इंडियन आयल द्वारा विशेष रूप से वित्त-पोषित यह कोष 25 करोड रुपए की राशि से शुरू किया गया, जिसमें हर वर्ष 10 करोड रुपए का अंशदान दिया जाता है। यह फाउंडेशन प्रत्येक राज्य और संघ शासित क्षेत्र में कम-से-कम एक विरासत स्थल को अपनाएगा।

आईओएफ का विजन और मिशन:

(क) विजन

एएसआई और एनसीएफ के साथ मिलकर राष्ट्रीय विरासत की सुरक्षा एवं परिरक्षण करना तथा प्रोत्साहन देना। राष्ट्रीय विरासत और संस्कृति में जागरूकता, ज्ञान और भागीदारी को बढ़ावा देना।

(ख) मिशन

लोगों के जीवन स्तमर को बढ़ाना तथा पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए पारिस्थितिकी संतुलन और विरासत का संरक्षण करने में मदद करना।

आईओएफ ट्रस्टीक

माननीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), भारत सरकार - ट्रस्टी अध्यक्ष; सचिव, पीएंडएनजी, भारत सरकार; अपर सचिव, पीएंडएनजी, भारत सरकार; महानिदेशक, एएसआई, सदस्य सचिव; राष्ट्रीय संस्कृति निधि, अध्यक्ष, इंडियन ऑयल निदेशक (एचआर); इंडियन ऑयल - ट्रस्टी सचिव, आईओएफ।

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वीर सावरकर ज्योत

वीर सावरकर ज्योत इंडियन ऑयल फाउंडेशन द्वारा भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अतुलनीय योगदान देने वाले 'स्वतंत्र वीर', विनायक दामोदर सावरकर को अंतिम श्रद्धांजलि देने के रूप में पोर्ट ब्लेयर स्थिसत सेलुलर जेल में वीर सावरकर ज्योत की स्थापना की गई। यह ज्योनत सेलुलर जेल के परिसर में अमर ज्योत के रूप में प्रज्ज वलित रहेगी, जिसकी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा इस परियोजना के लिए एलपीजी की निशुल्क आपूर्ति की गई है।
वीर सावरकर की 133वीं जन्म शताब्दी को मनाने के लिए इस ज्योत का 28 मई, 2016 को सेलूलर जेल के परिसर में श्री अमित शाह, राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय जनता पार्टी द्वारा श्री धर्मेंद्र प्रधान, माननीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), भारत सरकार; अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के माननीय लेफ्टिनेंट गवर्नर, ले. जनरल ए.के. सिंह; अंडमान एवं निकोबार दीप समूह के माननीय सांसद श्री विष्णु पादा रे; श्री बी. अशोक, अध्यक्ष, इंडियन ऑयल तथा इंडियन ऑयल के अन्य वरिष्ठ अधिकारीगणों की उपस्थि्ति में अनावरण किया गया।

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स्मारक:

The monuments प्रथम चरण में चयनित स्मारकों में निम्नलिखित शामिल हैं:

उत्तर     :   क़ुतुब मीनार (दिल्लीो)
पूर्व      :   कोणार्क सूर्य मंदिर (ओडिशा)
पश्चिम     :   कन्हेरी गुफाएं (महाराष्ट्रल)
दक्षिण    :   हाम्पीी (कर्नाटक)
मध्य  :   खजुराहो मंदिर समूह (मध्य प्रदेश)

इंडियनऑयल, एनसीएफ और एएसआई के माध्यम से संरक्षण कार्यों का वित्त-पोषण करेगा, जबकि इंडियन ऑयल फाउंडेशन इन स्थलों पर पर्यटकों के लिए विश्व स्तरीय सुविधाओं और सुविधा केंद्रों का विकास करेगा। फाउंडेशन हमारी राष्ट्रीय विरासत और संस्कृति में जागरुकता, ज्ञान और भागीदारी को भी प्रोत्साहन देगा।

वर्तमान स्थिति:

The Foundation is वर्तमान में फाउंडेशन निम्नलिखित विश्व / राष्ट्रीय विरासत स्थलों पर पर्यटन / सार्वजनिक बुनियादी सुविधाओं का विकास कर रहा है:

क) कोणार्क सूर्य मंदिर परिसर, ओडिशा
ख) खजुराहो मंदिर समूह, मध्य प्रदेश
ग)वैशाली, बिहार के निकट कोल्हुटआ
घ)कन्हेरी गुफाएं, महाराष्ट्र
ड.) भोगनंदीश्वर मंदिर, कर्नाटक

कर्नाटक में हाम्पीख, आंध्र प्रदेश में गोलकुंडा किला, राजस्थान में चित्तौड़ किला, गुजरात में रानी की वाव, तथा उत्तर प्रदेश में लखनऊ रेजीडेंसी की 5 नई परियोजनाओं के रूप में पहचान की गई है।


सूर्य मंदिर परिसर, कोणार्क, ओडिशा



13वीं सदी में निर्मित हिंदुओं के इस पूजा स्थल में सूर्य भगवान के विशाल रथ को दर्शाया गया है। इस मंदिर की एक विशाल सूर्य रथ के रूप में परिकल्पना की गई है जिसमें 12 जोड़ी शानदार अलंकृत पहिए हैं जिन्हें अश्वोंू द्वारा खींचा जा रहा है। मंदिर में एक गर्भगृह है जिसमें एक विशाल (लगभग 68 मी. ऊंचा) शिकारा, एक जगमोहन (30 वर्ग मी. तथा 30 मी. ऊंचा) है, और उसी धूरी पर एक पृथक नाट्य- मंदिर है। इसके अलावा, इसमें अनेक छोटे मंदिर हैं। समय के साथ गर्भगृह और नाट्य मंदिर की छत ढह गई है। नाट्य मंदिर में अन्य ओडिशा मंदिरों की तुलना में अधिक संतुलित वास्तुकला डिजाइन देखे जा सकते हैं। गर्भगृह में सूर्य भगवान की 3 दिशाओं से शानदार छवि प्रदर्शित होती है, जिसे लघु मंदिर भी माना जाता है। http://asi.nic.in/asi_monu_whs_konark.asp

इंडियन ऑयल फाउंडेशन द्वारा पर्यटन सुविधाओं का विकास:
•    मुख्य स्थल - भू-दृश्यय, बाहरी रिंग रोड से प्रवेश द्वार तक सीधे पहुंचने के लिए सड़क मार्ग की रूपरेखा बनाना तथा प्रसिद्ध सूर्य मंदिर के लिए बेहतर परिदृश्य।
•    व्याख्यान केंद्र - 4 प्रदर्श दीर्घाएं, दृश्य-श्रव्य केंद्र (बैठने की क्षमता: 200 व्यक्ति), वीआईपी लांज, प्रशासन कार्यालय, पुस्तिका / स्मारिका काउंटर, स्नैक्स काउंटर, प्रसाधन ब्लॉकक, टिकट काउंटर (कवर क्षेत्र: लगभग 2042 वर्ग मीटर)
•    शेष क्षेत्र का भू-दृश्य
•    मुख्य पार्किंग - 60 बसों, प्रसाधन ब्लॉक, प्रतीक्षा लांज, वाटर पॉइंट, स्नैक्स काउंटर और भू-दृश्य (कवर क्षेत्र: लगभग 351 वर्ग मी.) के लिए सुविधाएं।
•    ड्रॉप आउट प्वाटइंट - कारों / तिपहिया / दुपहिया वाहनों के लिए पार्किंग, प्रशासन ब्लॉक, प्रतीक्षा लांज, वाटर पॉइंट, स्नैक्स काउंटर, वर्षा शेल्टर और भू-दृश्य।



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खजुराहो समूह मंदिर:

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मध्य प्रदेश, खजुराहो समूह मंदिर हिंदू और जैन मंदिरों के समूह है। हाम्पीं से लगभग 175 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित ये स्मारक भारत में यूनेस्को विश्व विरासत स्थल हैं। खजुराहो, जो प्राचीन खरज्जु रा-वाहाका, के नाम से जाना जाता है, अपनी निजी कला और मंदिर वास्तुकला के विभिन्न नमूनों को प्रदर्शित करता है जो चंदेला शासन के समृद्ध और रचनात्मक काल की याद दिलाता है। यह चंदेला शासकों का प्रमुख सत्ताा केंद्र था, जिन्होंने इसे अनेक तलाबों, वास्तुकला और वैभवपूर्ण मूर्तिकला से अनेक विशाल मंदिरों को अलंकृत किया। स्थानीय परंपरा की सूची में ऐसे 85 मंदिरों का उल्लेतख है लेकिन अब परिरक्षण के विभिन्न चरणों में केवल 25 मंदिर ही बचे हैं। चौसठ-योगिनी, ब्रह्म तथा महादेव की मूर्तियां ग्रेनाइट पत्थ र से निर्मित हैं, जबकि अन्य सभी मंदिर महीन बलुआ पत्थर से निर्मित बादामी, गुलाबी या हल्के पीले रंग के हैं।

अधिक जानकारी के लिए, देखें: http://asi.nic.in/asi_monu_whs_khajuraho.asp

इंडियनऑयल फाउंडेशन द्वारा पर्यटन सुविधाओं का विकास:

पश्चिमी समूह में प्रस्तावित सुविधाएं
•    पर्यटन सुविधा केंद्र (लगभग 5600 वर्ग मी. के अंदर)
•   • पर्याप्त संख्या में बसों / कारों / दुपहिया / तिपहिया वाहनों के लिए सुविधा केंद्र (लगभग 2800 वर्ग मी. के अंदर)
•    मुख्य स्थल - संपर्क सड़क विकास
•    प्रवेश द्वार, पार्किंग, शेल्टर, प्रसाधन ब्लॉक, आदि

पूर्वी समूह में प्रस्तावित सुविधाएं
•    पार्किंग क्षेत्र
•    प्रवेश द्वार, शेल्टर, प्रसाधन ब्लॉक, आदि

दक्षिणी समूह में प्रस्तावित सुविधाएं
•   • प्रवेश द्वार, शेल्टर, प्रसाधन ब्लॉक, गार्ड केबिन, आदि.



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बिहार में वैशाली:

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आज वैशाली एक छोटा सा गांव है जो चारों ओर से केले और आम के वृक्षों तथा धान के खेतों से घिरा है। लेकिन इस क्षेत्र में हुए उत्खनन से इसके शानदार ऐतिहासिक अतीत का पता चला है। रामायण ग्रंथ में शूरवीर राजा विशाल का उल्लेख मिलता है, जिन्होंनने यहां शासन किया था। इतिहासकारों का मानना है कि दुनिया के सबसे पहले लोकतांत्रिक गणराज्य में से एक का यहां छठी ईसा-पूर्व में विकास हुआ था जिसकी सभा में निर्वाचित प्रतिनिधि थे जो वाज्जीा और लिचचावियों का काल था। और जबकि जो मौर्य और गुप्त की राजधानी पाटलिपुत्र ने गंगा के मैदानी इलाकों में राज किया था। वैशाली व्यापार और उद्योग का केंद्र थी। कहते हैं कि भगवान बुद्ध ने वैशाली का अनेक बार भ्रमण किया था और इसके पास स्थिधत कोल्हुवआ में अपना अंतिम उपदेश दिया था। इस अवसर को मनाने के लिए सम्राट अशोक ने तीसरी सदी ईसा-पूर्व में यहां अपने सबसे प्रसिद्ध अशोक स्तंभ की स्थापना की थी। बुद्ध के महापरिनिर्वाण के सौ साल बाद यहां दूसरी महान बौद्ध परिषद का आयोजन किया। इस अवसर पर 2 स्तूिपों की स्थापना की गई।

अधिक जानकारी के लिए, देखें: http://bstdc.bih.nic.in/vaishali.htm

इंडियन ऑयल फाउंडेशन द्वारा पर्यटन सुविधा केंद्रों का विकास:

कोलुहा व्याख्यान केंद्र में प्रस्तावित सुविधाएं:

व्याख्यान केंद्र का स्वसरूप मुख्यत: 64 मी. x 60 मी. भूखंड पर निर्मित एक मंजिला भवन होगा, जिसमें निम्नहलिखित शामिल होंगे:
•    दृश्य-श्रृव्य केंद्र
•    प्रदर्श दीर्घा, कार्यालय ब्लॉक और स्वागत-कक्ष
•    टिकट काउंटर
•    वीआईपी लांज, बाल देखभाल कक्ष, प्राथमिक चिकित्सा सहायता केंद्र
•    कैफेटेरिया (फूड कोर्ट) और पेयजल स्थाल
•    स्मारिका शॉप, स्त्री / पुरुष प्रसाधन ब्लॉक
•    विद्युत, यांत्रिक और नलसाजी कार्य, सूचना-पट्ट, बैठने के लिए बैंच आदि
•    सुरक्षा व्यवस्था जैसे मैटल डिटेक्टर, सीसीटीवी आदि

आसपास के क्षेत्र में बेंच / वर्षा शेल्टर तथा बाहरी हिस्सेठ में विद्युतीकरण, यांत्रिक और पाइपलाइन कार्य किया जाएगा, जिसमें विभिन्न सूचना-पट्ट भी लगाए जाएंगे।



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कन्हेरी गुफाएं, मुंबई:

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कन्हेरी गुफाओं में अनेक शैल स्मारक है, जो मुंबई की पश्चिमी सीमा पर बोरीवली के उत्तर में स्थित हैं। कन्हेरी, कन्हारसेला, कृष्णागिरी, कन्हेरी के प्राचीन शिलालेख, एक प्रमुख बौद्ध केंद्र था। कन्हेरी 6 मील की दूरी पर स्थित साल्सेट द्वीप समूह में स्थित है। गुफाओं का उत्खनन ब्रेसिया ज्वाेलामुखी गुफा से हुआ है जो समुद्री सतह से 1550 फुट की ऊंचाई पर स्थित हैं। कन्हेरी को एक पर्वत पर सबसे अधिक संख्या में उत्खनित गुफाओं का श्रेय प्राप्त है। इसके पश्चिम में बोरीवली रेलवे स्टेशन है और इसके दर्रे में अरब सागर है।

अधिक जानकारी के लिए,देखें: http://asi.nic.in/asi_monu_tktd_maha_kanhericaves.asp

इंडियन ऑयल फाउंडेशन द्वारा पर्यटन सुविधा केंद्रों का विकास:

कन्हेरी गुफाओं में और उसके आसपास स्थित सुविधाओं में विभिन्न प्रकार का प्रस्तावित विकास कार्य नीचे दिया गया है:

गुफाओं से सटा खुला क्षेत्र

प्रवेश में पर्यटन सुविधाएं
•   टिकट काउंटर
•    स्मारिका शॉप और नारियल काउंटर आदि.
•    मुख्य प्रवेश द्वार का नवीकरण / पुनरुद्धार तथा टिकट काउंटर

गुफाओं से सटी भूमि
•    कैफेटेरिया
•    वर्षा शेल्टर
•    प्रसाधन का नवीनीकरण
•    भू-दृश्य आदि
•    सिट आउट्स (बैंच)

मौजूदा हाल ढांचे में व्याख्यान केंद्र

पर्यटकों के लिए सुरक्षा और सूचना से संबंधित अन्य कार्य
•    सूचना पट्ट
•    मेटल डिटेक्टर, सीसीटीवी, आदि जैसी सुरक्षा व्यवस्था
•    बिना आवाज वाला जेनरेटर सेट
•    पेयजल सुविधा (पेयजल आपूर्ति व्यवस्था, ट्यूबवेल आदि).
•    रैंप और रेलिंग लगाना, जहां आवश्यकता हो।



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बेंगलुरु के निकट भोगनंदीश्वलर मंदिर:

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भोगनंदीश्वार मंदिर वास्तुकला 9वीं से 15वीं सदी तक के द्रविड़ काल के सबसे महत्वपूर्ण नमूनों में से एक है। दोहरे महाद्वार वाले 112.8 मी. x 76.2 मी. माप के अपने प्रकार से घिरे इस परिसर में भोगनंदीश्वार (उत्त्र) और अरुणाचलेश्वर (दक्षिण) शिव भगवान को समर्पित दो मंदिर हैं। इन दोनों के बीच एक छोटा सा मंदिर है। भोगनंदीश्वार मंदिर, बंगलौर ग्रामीण जिले में नंदी पर्वत क्षेत्र में स्थित है। यह सप्ताह के अंत में छुट्टियां मनाने के लिए उपयुक्त स्थल है। इस पहाड़ी में प्राचीन वनों के अलावा, टीपू सुल्तान द्वारा निर्मित नंदी किले सहित कई दिलचस्प स्थल हैं।

अधिक जानकारी के लिए,देखें:http://asibengalurucircle.org/kolar-7.html

इंडियन ऑयल फाउंडेशन द्वारा पर्यटन सुविधा केंद्र का विकास:

भोगनंदीश्व र मंदिर परिसर के आस-पास सुविधाओं के प्रस्तावित विकास का ब्यौ रा नीचे दिया गया है:

•    पार्किंग (30-40 वाहन) सहित पर्यटन प्लाकजा, पर्यटकों के लिए सुविधाएं, कियोस्क, व्याख्यान केंद्र, जन सुविधाएं, स्मा)रिका शॉप और छोटा कैफेटेरिया
•    संपूर्ण परिसर के लिए सूचना-पट्ट
•    मठ मंडप तथा प्रचालन सहित मंदिर परिसर का 10 वर्ष के लिए प्रकाश व्यवस्था करना।
•    पर्यावरण सुधार और भू-दृश्य कार्य।



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